मिर्गी से जूझ रहे मरीजों के लिए एम्स से राहत देने वाली पहल सामने आई है। अब मरीजों को अपनी दवाओं के प्रभाव और सही मात्रा की जांच के लिए निजी लैब्स के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एम्स प्रशासन ने अस्पताल में ही थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग (TDM) जांच की मुफ्त सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया है।
दवाओं की सही मात्रा जानना होगा आसान
थेरेप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग के जरिए मरीज के रक्त में मौजूद दवा की मात्रा मापी जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि दवा न तो कम असर कर रही है और न ही शरीर में विषाक्त प्रभाव डाल रही है। मिर्गी के इलाज में यह जांच बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि दवा की थोड़ी सी गड़बड़ी से दौरे दोबारा आ सकते हैं या साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं।
चार प्रमुख एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं की होगी जांच
एम्स ने अपने सभी विभागों और केंद्रों को निर्देश जारी किए हैं कि मिर्गी मरीजों के ब्लड सैंपल निर्धारित प्रयोगशालाओं में भेजे जाएं। इस सुविधा के तहत फेनोबार्बिटल, कार्बामाजेपाइन, वैल्प्रोइक एसिड और फिनाइटोइन जैसी प्रमुख मिर्गी की दवाओं की जांच की जाएगी।
ओपीडी और भर्ती मरीज दोनों उठा सकेंगे लाभ
यह जांच सुविधा एम्स में ओपीडी में आने वाले मरीजों और अस्पताल में भर्ती मरीजों—दोनों के लिए उपलब्ध होगी। दिल्ली एम्स में ओपीडी मरीज सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक ओपीडी कलेक्शन सेंटर (कमरा नंबर 3) में सैंपल दे सकते हैं। इसके अलावा झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) परिसर में भी यह सेवा उपलब्ध कराई गई है।
पहले हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे
अब तक मरीजों को इस जांच के लिए बाहर की लैब्स में 390 रुपये से लेकर करीब 1880 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। एम्स की इस नई पहल से न केवल मरीजों का पैसा बचेगा, बल्कि समय और मानसिक तनाव भी कम होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम
एम्स का यह फैसला मिर्गी के इलाज को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित टीडीएम जांच से इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी और मरीजों की जीवनशैली में भी सुधार आएगा।