ब्रह्मपुत्र पर चीन की मेगा परियोजना पर नए सवाल, वैज्ञानिक रिपोर्ट में भूकंपीय खतरे की चेतावनी

बीजिंग। ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) पर चीन की महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के बाद फिर चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित बांध क्षेत्र के नीचे एक सक्रिय भूगर्भीय फॉल्ट लाइन मौजूद है, जिससे भविष्य में बड़े भूकंप और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन के सामने आने के बाद परियोजना की सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

यह परियोजना भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की सीमा के निकट स्थित है, जिसके कारण भारत पहले से ही इस निर्माण को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है। चीन का कहना है कि परियोजना को अत्याधुनिक तकनीक और विस्तृत भूवैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर मंजूरी दी गई है तथा इससे निचले बहाव वाले देशों को कोई खतरा नहीं होगा। हालांकि, हालिया वैज्ञानिक रिपोर्ट में क्षेत्र की ‘पाइझेन फॉल्ट’ को सक्रिय भूगर्भीय संरचना बताते हुए अतिरिक्त जोखिम की आशंका जताई गई है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि इस क्षेत्र में भविष्य में तेज भूकंप आता है तो बड़े पैमाने पर भूस्खलन हो सकता है, जिससे बांध, सुरंगों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहेगी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जाए तथा कमजोर पहाड़ी क्षेत्रों को अतिरिक्त तकनीकी सुरक्षा प्रदान की जाए।

करीब 167.8 अरब डॉलर की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य पिछले वर्ष शुरू हुआ था। चीन का लक्ष्य इस जलविद्युत परियोजना से प्रतिवर्ष 300 अरब किलोवॉट घंटे से अधिक बिजली उत्पादन करना है, जिससे करोड़ों लोगों को बिजली उपलब्ध कराई जा सके।

रिपोर्ट में वर्ष 2017 में तिब्बत के मिलिन क्षेत्र में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप का भी उल्लेख किया गया है, जिसे इस क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता का उदाहरण बताया गया है। साथ ही, प्राचीन भूवैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह इलाका लंबे समय से भूगर्भीय गतिविधियों के प्रभाव में रहा है।

हालांकि, चीनी प्रशासन का कहना है कि परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है। वहीं, भारत इस परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और जल सुरक्षा प्रभावों को लेकर पहले से ही अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है। ताजा वैज्ञानिक अध्ययन के बाद इस परियोजना की सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

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