नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास शारजाह एंकरेज में कच्चे तेल के टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पनामा के झंडे वाले टैंकर MT Gem No. 2 पर 9 अक्टूबर को हमला किया गया था। जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी दी।
नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, घटना के बाद स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जहाज की प्रबंधन कंपनी के संपर्क में रहकर भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
समुद्री व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के बीच इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत की पहल
खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को देखते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की शुरुआत की गई है।
इस पहल का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा से जुड़े देशों को एक मंच पर लाकर व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना है।
25 देशों ने पहली बैठक में लिया हिस्सा
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान शुरू किए गए इस समूह की पहली बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसलो न्यांती ने की। बैठक में 25 देशों ने भाग लिया।
भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त बयान जारी कर खाड़ी क्षेत्र और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की निंदा की। दोनों देशों ने कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित करने के साथ निर्दोष लोगों की जान को भी खतरे में डालते हैं।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भारत का जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया में नाविकों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों को रोकना बेहद जरूरी है।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु बनाए रखने के साथ नाविकों की जान बचाने और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। शारजाह के पास टैंकर पर हुआ हमला इसी चुनौती को रेखांकित करता है।