अग्रसेन जयंती पर ट्विन सिटी में निकली शोभायात्रा,पारंपरिक परिधानों में सजे समाज जनों पर शहरवासियों ने की फूलों की वर्षा

दुर्ग-भिलाई। ट्विन सिटी दुर्ग-भिलाई में महाराजा अग्रसेन जयंती महोत्सव के अवसर पर अग्रवाल समाज द्वारा इस वर्ष बेहद भव्य, गरिमामयी और अनोखे ढंग से जयंती समारोह मनाया गया। उत्सव के अंतिम चरण में जहां दुर्ग शहर में समाज के लोग गौरवशाली पारंपरिक परिधानों में सड़कों पर उतरे, वहीं भिलाई के सेक्टर-6 में अग्रवाल समाज ने पहली बार रात्रिकालीन शोभायात्रा निकालकर एक नया इतिहास रच दिया।

दुर्ग  में अग्रवाल समाज द्वारा भगवान अग्रसेन की जयंती पर विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शोभराज अग्रवाल एवं समाज के वरिष्ठ जनों ने पूरे विधि-विधान से ‘अग्र ध्वज’ दिखाकर इस भव्य यात्रा को रवाना किया। अग्रसेन भवन से शुरू हुई यह शोभायात्रा अग्रसेन चौक, इंदिरा मार्केट और गंजपारा जैसे शहर के प्रमुख व्यावसायिक मार्गों से होकर गुजरी।

यात्रा में समाज की महिलाएं पारंपरिक लाल साड़ियों में और पुरुष श्वेत कुर्ता-पायजामा पहने माता माधवी और महाराजा अग्रसेन के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। पूरे मार्ग में दुर्ग के स्थानीय नागरिकों और सतरंगी सजे बाजारों के व्यापारियों द्वारा फूलों की भारी वर्षा कर शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया। वहीं दूसरी ओर, भिलाई के सेक्टर-6 में अग्रवाल समाज ने इस बार एक अनूठी और ऐतिहासिक शुरुआत की। भिलाई के इतिहास में पहली बार आयोजित की गई भव्य रात्रिकालीन शोभायात्रा ने हर किसी का ध्यान खींचा। दूधिया रोशनी और आसमान को चमकाती रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच निकली इस यात्रा का मुख्य आकर्षण बनारस की तर्ज पर की गई मां महालक्ष्मी और महाराजा अग्रसेन की भव्य महाआरती रही। इस आलौकिक और दिव्य दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

सांस्कृतिक व खेल प्रतियोगिताओं का हुआ समापन

दुर्ग-भिलाई के विभिन्न अग्रसेन भवनों में बीते तीन से चार दिनों से उत्सव का माहौल था। इस दौरान समाज के लोगों के लिए खेलकूद, मटकी फोड़, ट्रेडिशनल साड़ी ड्रेपिंग और बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस जैसी कई मनोरंजक व ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही थीं, जिसका समापन इस भव्य नगर भ्रमण के साथ हुआ।

समाज को एकजुट करने का प्रयास

अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि इस तरह के वृहद आयोजनों से न केवल पूरा समाज एकजुट होता है, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी को भी अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और महाराजा अग्रसेन जी के सिद्धांतों व पदचिह्नों को करीब से जानने और समझने का बेहतरीन अवसर मिलता है।

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