नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ (One Nation One Election) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने इसके लिए कानूनी और संवैधानिक खाका लगभग तैयार कर लिया है। प्रस्तावित योजना के तहत साल 2029 में लोकसभा चुनावों के साथ उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने की तैयारी है। इस संबंध में कानून मंत्रालय स्तर पर अंतिम समीक्षा जारी है और आगामी संसद सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है।
यूपी विधानसभा का कार्यकाल हो सकता है छोटा
सरकार के ब्लूप्रिंट के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल को लोकसभा चुनावों के साथ समायोजित करना है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन प्रस्तावित योजना के तहत 2027 में बनने वाली विधानसभा का कार्यकाल पांच वर्ष के बजाय लगभग दो वर्ष तक सीमित किया जा सकता है, ताकि 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी कराए जा सकें। इसके लिए संविधान में विशेष एकमुश्त प्रावधान जोड़े जाने की तैयारी है।
संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून में होंगे संशोधन
यह पूरी योजना पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति और विधि आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। इसे लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 83, 85 और 172 सहित कई प्रावधानों में संशोधन किए जाएंगे। इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में भी आवश्यक बदलाव प्रस्तावित हैं।
दो चरणों में होंगे चुनाव
सरकार के प्रस्तावित मॉडल के अनुसार चुनावी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी।
पहले चरण में पूरे देश में एक साथ लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कराए जाएंगे। दूसरे चरण में मुख्य चुनाव के 100 दिनों के भीतर नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत चुनाव एक साथ संपन्न कराए जाएंगे। इसके लिए पूरे देश में एकीकृत मतदाता सूची और राष्ट्रीय मतदाता पहचान प्रणाली लागू करने की भी तैयारी है।
सरकार का दावा- खर्च बचेगा, विकास कार्यों को मिलेगी गति
केंद्र सरकार का मानना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं और सुरक्षा व्यवस्था व चुनावी प्रबंधन पर भारी खर्च आता है। एक साथ चुनाव होने से सरकारी खर्च में कमी आएगी, सुरक्षा बलों और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी।
हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए व्यापक संवैधानिक संशोधन और राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी। यदि प्रस्तावित विधेयक संसद से पारित होता है, तो 2029 देश के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।