नई दिल्ली : जन्म से दोनों भुजाओं से विकलांग होने के बावजूद पैरातीरंदाज शीतल देवी ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और हौसले से देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अब शीतल को जेद्दा में आयोजित होने वाले एशिया कप (स्टेज-3) के लिए भारत की सक्षम (Able-bodied) जूनियर टीम में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय पैरा खिलाड़ी ने सक्षम तीरंदाजी टीम में जगह बनाई है।
शीतल का चयन सोनीपत में हुए चार दिवसीय राष्ट्रीय चयन ट्रायल के आधार पर हुआ, जहां उन्होंने देशभर के 60 से अधिक सक्षम तीरंदाजों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। 18 वर्षीय जम्मू-कश्मीर की इस खिलाड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में 703 अंक (352 + 351) अर्जित किए, जो शीर्ष क्वालिफायर तेजल साल्वे के बराबर था। फाइनल में तेजल (15.75) पहले, वैदेही जाधव (15) दूसरे और शीतल (11.75) तीसरे स्थान पर रहीं।
टीम में चयन के बाद शीतल ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा —
“जब मैंने तीरंदाजी शुरू की थी, तब मेरा सपना था कि एक दिन मैं सक्षम तीरंदाजों के साथ मुकाबला करूं। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन हर असफलता ने मुझे कुछ नया सिखाया। आज मेरा वह सपना हकीकत के और करीब है।”
शीतल देवी, जिन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 में मिश्रित टीम कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, कहती हैं कि उन्हें प्रेरणा तुर्की की पैरालंपिक चैंपियन ओजनूर क्यूर गिर्डी से मिलती है — जो सक्षम तीरंदाजों के मुकाबलों में भी भाग लेती हैं।
यह उपलब्धि न केवल शीतल के लिए बल्कि भारतीय खेल जगत के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसने साबित कर दिया कि सच्ची प्रतिभा किसी शारीरिक सीमा की मोहताज नहीं होती।