पीएम मोदी का छोटा काफिला बना चर्चा का विषय, अपील के बाद खुद दिखाई पहल

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल की बचत को लेकर देशवासियों से अपील करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद भी इसकी शुरुआत कर दी है। मंगलवार को पीएम मोदी अपने आवास से केवल दो गाड़ियों के छोटे काफिले के साथ केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पहुंचे। एक वाहन में प्रधानमंत्री स्वयं मौजूद थे, जबकि दूसरी गाड़ी में उनकी सुरक्षा में तैनात एसपीजी कर्मी सवार थे।

प्रधानमंत्री के इस कदम को ईंधन बचत अभियान की दिशा में एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उन्होंने देश को यह संकेत देने की कोशिश की है कि ऊर्जा संरक्षण केवल अपील तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी शुरुआत नेतृत्व स्तर से होनी चाहिए।

इससे पहले रविवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का सीमित और समझदारी से उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा कम करने और संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर जोर दिया था। साथ ही उन्होंने एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने की भी सलाह दी थी।

प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। रेखा गुप्ता और योगी आदित्यनाथ ने भी प्रशासनिक स्तर पर ईंधन बचत को लेकर कदम उठाने की बात कही है। कई सरकारी बैठकों को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित करने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

इधर, प्रधानमंत्री की अपील के बाद बाजार और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कुछ इसे संभावित आर्थिक दबावों की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।

इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मौजूदा हालात में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखना आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

वहीं भाजपा नेता नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने खुद उदाहरण पेश कर यह साबित किया है कि ऊर्जा संरक्षण अब जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व स्वयं बदलाव की शुरुआत करता है, तो समाज भी उससे प्रेरित होता है।

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