दुर्ग। कुछ लोग अपने जीवन से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से पहचाने जाते हैं। वे चले जाते हैं, लेकिन उनके सेवा भाव, समर्पण और मानवीय संवेदनाएं हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहती हैं। एस आर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नेत्र विभाग में कार्यरत प्रेम चंद्राकर भी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे। लगभग 12 वर्षों तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने मरीजों की सेवा का अपना संकल्प नहीं छोड़ा। लंबी बीमारी के बाद उनके निधन से एस.आर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सहकर्मियों और अस्पताल परिवार ने नम आंखों से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रेम चंद्राकर का जीवन संघर्ष, हिम्मत और मानव सेवा की एक ऐसी मिसाल रहा, जिसे शब्दों में समेटना आसान नहीं है। एक ओर वे स्वयं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में आने वाले मरीजों की सेवा में पूरी निष्ठा से जुटे रहते थे। अपनी पीड़ा को पीछे रखकर दूसरों के दर्द को समझना और उनकी मदद के लिए तत्पर रहना उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी।
प्रेम चंद्राकर ने अपने जीवन में बीमारी को कभी अपने कर्तव्य के आड़े नहीं आने दिया। लगभग 12 वर्षों तक कैंसर से संघर्ष करते हुए भी मरीजों के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ। अस्पताल में उनके साथ काम करने वाले सहकर्मियों के लिए उनका जुझारूपन हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा।
उनका मानना था कि मानव सेवा ही माधव सेवा है। इसी विचार को उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया। मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, सहयोग की भावना और अपने कार्य के प्रति निष्ठा ने उन्हें अस्पताल परिवार का एक प्रिय सदस्य बना दिया था।
उनके निधन से अस्पताल के सहकर्मियों के बीच एक ऐसी रिक्तता पैदा हो गई है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। आज उनके जाने का दुख केवल एक कर्मचारी के बिछड़ने का नहीं, बल्कि एक ऐसे सेवाभावी इंसान के खोने का है, जिसने अपनी जिंदगी के कठिनतम दौर में भी दूसरों की सेवा को प्राथमिकता दी।
एस.आर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अस्पताल के चेयरमैन डॉ. संजय तिवारी ने प्रेम चंद्राकर को याद करते हुए भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. संजय तिवारी ने कहा कि प्रेम चंद्राकर का जाना अस्पताल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जुझारू व्यक्तित्व, सेवा के प्रति समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करना हम सभी के लिए प्रेरणा दायी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रेम चंद्राकर ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सेवा का भाव किसी परिस्थिति का मोहताज नहीं होता। स्वयं बीमारी से संघर्ष करते हुए भी मरीजों की सेवा करना उनके व्यक्तित्व की महानता को दर्शाता है। उनके योगदान और उनकी स्मृतियां हमेशा अस्पताल परिवार के साथ रहेंगी।
श्रद्धांजलि सभा में डॉ. रंजन सेनगुप्ता, डॉ. के.के. जैन, डॉ. अश्वनी एवं जगदीप नारायण पांडे ने भी प्रेम चंद्राकर के व्यक्तित्व और उनके सेवाभाव पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके लंबे संघर्ष, कार्य के प्रति समर्पण और मरीजों के साथ उनके आत्मीय व्यवहार को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि प्रेम चंद्राकर ने जिस साहस और धैर्य के साथ अपनी बीमारी का सामना किया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा है।
श्रद्धांजलि सभा में एस.आर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के समस्त स्टाफ की उपस्थिति रही। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।