अखिलेश-मायावती समेत 44 नेताओं को मिलेगा सुरक्षा कवच! बुलेटप्रूफ जैकेट देने की तैयारी

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार ने एहतियाती कदम उठाने की तैयारी की है। सुरक्षा मुख्यालय की ओर से करीब 10 लाख रुपये की लागत से बुलेटप्रूफ जैकेट्स खरीदी गई हैं। जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती समेत करीब 44 नेताओं को ये जैकेट उपलब्ध कराने की योजना है।

इस सूची में सरकार के 11 मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और खुफिया इनपुट को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेताओं के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।

Y से Z+ सुरक्षा वाले नेता सूची में

बताया जा रहा है कि Y कैटेगरी से लेकर Z+ सुरक्षा कवर वाले नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट देने की तैयारी है। इनमें मंत्री संजय निषाद और नंद गोपाल नंदी समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा पूर्व मंत्री और विधायकों को भी इस सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में रखा गया है। जानकारी के मुताबिक संगीत सोम और सुरेश राणा समेत कुछ अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भी बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई जाएगी।

चुनावी रैलियों में सुरक्षा पर जोर

विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं की जनसभाओं, रैलियों और लगातार होने वाले चुनावी दौरों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। ऐसे में बुलेटप्रूफ जैकेट की व्यवस्था को नेताओं की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराने के पीछे किसी विशेष खतरे या ताजा सुरक्षा इनपुट की भूमिका है या नहीं। फिलहाल इसे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के आधार पर एहतियाती कदम बताया जा रहा है।

चुनाव से पहले बढ़ाई जा रही सतर्कता

उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियां तेज होने के साथ ही वीआईपी सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सक्रियता भी बढ़ गई है। खास तौर पर पहले से सुरक्षा कवर प्राप्त प्रमुख नेताओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।

बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीद और प्रस्तावित वितरण को इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि चुनावी कार्यक्रमों और राजनीतिक आयोजनों के दौरान नेताओं की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।

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