राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- सेना इंजीनियरी सेवा देश के रक्षा ढांचे की मजबूत रीढ़

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में सेना इंजीनियरी सेवा (एमईएस) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में एमईएस की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए इसे देश के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेना इंजीनियरी सेवा सामरिक महत्व के प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि एमईएस अधिकारियों का कौशल, समर्पण और परिश्रम यह सुनिश्चित करता है कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

उन्होंने युवा अधिकारियों से पेशेवर उत्कृष्टता, सत्यनिष्ठा, तकनीकी दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही नवाचार और आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक परियोजना में उत्कृष्टता प्राप्त करने का लक्ष्य होना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जब दुनिया विभिन्न संघर्षों और भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, आत्मनिर्भरता राष्ट्रों के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर देश संकट के समय आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विकास की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अधिक सक्षम होते हैं।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं, उन्नत प्रौद्योगिकी और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार के महत्व को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि सेना इंजीनियरी सेवा ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को बढ़ावा देने और उनके उपयोग में सक्रिय योगदान दे रही है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच संधारणीय विकास अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गया है। उन्होंने अधिकारियों से योजना निर्माण, निर्माण कार्यों और रखरखाव में पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कार्य-पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेना इंजीनियरी सेवा के अधिकारियों का योगदान केवल सुरक्षित और सशक्त भारत के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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