सरकारी बंगला खाली करेंगी राबड़ी देवी? बिहार की सियासत में नई हलचल

पटना। बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भवन निर्माण विभाग द्वारा 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने के लिए 29 जून की अंतिम समयसीमा तय किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में पूरे दिन हलचल बनी रही। हालांकि, राजद या लालू परिवार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

अंतिम चरण में पहुंची शिफ्टिंग

पिछले दो दिनों से सरकारी आवास से सामान हटाने का काम तेजी से चल रहा है। घर का सामान ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए कौटिल्य नगर स्थित लालू परिवार के नए निजी आवास और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास में पहुंचाया जा रहा है। बंगले में लगे सीसीटीवी कैमरे भी हटाए जा चुके हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आवास खाली करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

सरकारी सामान की सूची मांगी

भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए राबड़ी देवी ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर सरकारी संपत्ति और विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए सामान की आधिकारिक सूची (इन्वेंट्री) उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

राजद सूत्रों का कहना है कि पहले तेजस्वी यादव द्वारा सरकारी आवास खाली करने के दौरान सरकारी सामान को लेकर विवाद हुआ था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पूरी प्रक्रिया दस्तावेजों के आधार पर पूरी की जा रही है। वहीं विभाग को करीब दो दशक पुराने रिकॉर्ड जुटाने में भी कठिनाई हो रही है।

निजी मकान में शिफ्ट होने की तैयारी

भवन निर्माण विभाग के अनुसार, राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था, जबकि 10, सर्कुलर रोड का बंगला अब मंत्री नंद किशोर राम के नाम आवंटित किया जा चुका है। चार बार नोटिस जारी होने के बाद अब बंगला खाली करने की प्रक्रिया तेज हुई है।

बताया जा रहा है कि लालू परिवार आवंटित नए सरकारी बंगले में जाने के बजाय कौटिल्य नगर स्थित अपने नए निजी मकान में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा है।

मुख्यमंत्री का विपक्ष पर निशाना

इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति या पारिवारिक विरासत नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी आवास नियमों के अनुसार आवंटित होते हैं और बिहार में राजशाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र चलता है।

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