Rare Earth Deal 2025: अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया गठबंधन से हिलेगा चीन का दबदबा

वाशिंगटन : अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा भू-राजनीतिक कदम उठाया है। वॉशिंगटन डी.सी. स्थित व्हाइट हाउस में ट्रंप और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच लगभग 8.5 अरब डॉलर की ऐतिहासिक डील पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया अमेरिका को दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals) की सप्लाई करेगा, जबकि अमेरिका ऑस्ट्रेलिया को परमाणु पनडुब्बियां (Nuclear Submarines) प्रदान करेगा।

प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता रेयर अर्थ सेक्टर में चीन के वर्चस्व को कमजोर करेगा, क्योंकि अब तक दुनिया के अधिकांश रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन चीन के नियंत्रण में रही है।

ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख खनिज उत्पादकों में शामिल है — लीथियम, कोबाल्ट और मैग्नीज़ के उत्पादन में इसका स्थान शीर्ष पांच देशों में आता है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर चिप्स, सोलर पैनल्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, खनिज उत्पादन में अग्रणी होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया रिफाइनिंग क्षमता के मामले में चीन पर निर्भर है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया अपने करीब 90% लीथियम को प्रोसेसिंग के लिए चीन भेजता है, जिससे चीन को भारी आर्थिक लाभ होता है।

नई डील के तहत, अगले छह महीनों में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया लगभग 3 अरब डॉलर का संयुक्त निवेश करेंगे, ताकि दोनों देश मिलकर एक वैकल्पिक सप्लाई चेन स्थापित कर सकें। इस परियोजना में ऑस्ट्रेलिया की Lynas Bills कंपनी प्रमुख भूमिका निभाएगी, जो अब अमेरिका के टेक्सास में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन के एकाधिकार को सीधी चुनौती देगा और अमेरिका को एक अधिक विश्वसनीय और स्थायी स्रोत प्रदान करेगा। यह समझौता न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि वैश्विक रणनीतिक शक्ति-संतुलन के लिहाज से भी एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *