दुर्ग, 09 मई 2026। जिला न्यायालय परिसर दुर्ग सहित प्रदेशभर में शनिवार को वर्ष 2026 की दूसरी नेशनल लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर का शुभारंभ माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मुख्य संरक्षक द्वारा मुंगेली से वर्चुअल माध्यम से किया गया। कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिले ऑनलाइन जुड़े रहे।
मुख्य न्यायाधिपति ने इस अवसर पर लोक अदालत को त्वरित और सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम बताते हुए सभी जिलों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और संबंधित विभागों से अधिक से अधिक मामलों के समाधान हेतु समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

38 खंडपीठों का गठन
दुर्ग जिले में लोक अदालत के लिए कुल 38 खंडपीठों का गठन किया गया। इनमें जिला न्यायालय, परिवार न्यायालय, भिलाई-3, पाटन, धमधा सहित किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत और उपभोक्ता फोरम शामिल रहे। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में भी मामलों का निपटारा किया गया।
हजारों मामलों का निपटारा
इस लोक अदालत में राजीनामा योग्य आपराधिक, सिविल, मोटर दुर्घटना दावा, बैंकिंग, बिजली और दूरसंचार से जुड़े मामलों का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान किया गया।
कुल आंकड़े इस प्रकार रहे—
- 17,906 न्यायालयीन मामलों का निपटारा
- 7,75,129 प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान
- कुल समझौता राशि: 52,14,67,009.16 रुपये
बैंकिंग, बिजली और टेलीकॉम से जुड़े हजारों विवादों का भी निपटारा किया गया।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और भोजन व्यवस्था
लोक अदालत के दौरान जिला चिकित्सालय दुर्ग के सहयोग से निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
इसके अलावा गुरुद्वारा शहीद बाबा दीप सिंह और श्री गुरु सिंह सभा के सहयोग से निःशुल्क भोजन व्यवस्था की गई, जिसका हजारों लोगों ने लाभ लिया। साथ ही जेल उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
महत्वपूर्ण मामलों का समाधान
लोक अदालत में कई अहम मामलों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निपटारा किया गया—
- मोटर दुर्घटना मामले में 1.80 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत
- आपराधिक मामलों में पक्षकारों के बीच समझौते से विवाद समाप्त
- पारिवारिक और संपत्ति विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान
न्यायिक प्रणाली का प्रभावी मॉडल
लोक अदालत में यह स्पष्ट हुआ कि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान आपसी सहमति से मिनटों में किया जा सकता है। इसमें न किसी पक्ष की हार होती है और न जीत, बल्कि दोनों पक्ष संतुष्ट होकर न्याय प्राप्त करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में न्यायिक अधिकारियों ने इसे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सफल प्रयास बताया।