दुर्ग। चेक बाउंस (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881) से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए दुर्ग में आयोजित वर्ष 2026 की पहली विशेष लोक अदालत सफल रही। इस दौरान 449 मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निराकरण किया गया, जबकि कुल समझौता राशि 13 करोड़ 88 लाख 5 हजार 129 रुपये रही।
विशेष लोक अदालत का शुभारंभ 18 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा से वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारी ऑनलाइन जुड़े।
मुख्य न्यायाधिपति ने लोक अदालत को सुलभ और त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम बताते हुए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और बैंकों से समन्वय बनाकर अधिक से अधिक चेक बाउंस मामलों का निराकरण करने का आह्वान किया।

दुर्ग में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के मार्गदर्शन में कुल 15 खंडपीठों का गठन किया गया। इनमें 1,001 प्रकरणों को सुनवाई के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें से 449 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा हुआ।
विशेष लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से कम खर्च, कम समय और स्थायी समाधान उपलब्ध कराना था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, इस सफलता के पीछे न्यायिक अधिकारियों की सुनियोजित रणनीति, अधिवक्ताओं, बैंकों और मध्यस्थता केंद्र का समन्वित प्रयास रहा।
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट आकांक्षा राठौर और अंजली सिंह की विशेष टीम ने पक्षकारों से लगातार संपर्क कर समझौते के लिए प्रेरित किया।
मध्यस्थता केंद्र, दुर्ग ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मध्यस्थ न्यायाधीशों ने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर कई मामलों में सहमति से विवाद समाप्त कराए। जिला अधिवक्ता संघ, राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंकों के अधिकारियों तथा विधि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने विशेष लोक अदालत को सफल बनाने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थ न्यायाधीशों, न्यायालयीन कर्मचारियों और पक्षकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी आपसी समझौते और संवाद की भावना को बढ़ावा देकर न्याय को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाया जाएगा।