समाज की जरूरतों के साथ आगे बढ़ रहा है आरएसएस, मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं: मोहन भागवत

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि संघ अपने मूल विचारों से विचलित हुए बिना समय के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का बदलाव नहीं, बल्कि स्वाभाविक विकास की प्रक्रिया है, जिसके कारण संघ आज लोगों को नए रूप में दिखाई दे रहा है।

भागवत यह बात संघ कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कह रहे थे, जहां आरएसएस की सौ साल की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ के गीतों का लोकार्पण किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने संघ की यात्रा की तुलना प्रकृति से करते हुए कहा कि जैसे एक बीज से पौधा निकलता है और समय के साथ वह विशाल वृक्ष बन जाता है, वैसे ही संघ भी विकसित हुआ है, लेकिन उसकी जड़ें आज भी वही हैं।

उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा और उसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और संघ की पहचान हेडगेवार जी के विचारों से ही बनी है।

डॉ. हेडगेवार के जीवन पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने बताया कि बहुत कम उम्र में माता-पिता को प्लेग जैसी गंभीर बीमारी के कारण खोने के बावजूद उनके व्यक्तित्व पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में इतना बड़ा आघात सहने के बाद भी हेडगेवार जी का मानसिक संतुलन और आत्मबल असाधारण था, जो उनके मजबूत चरित्र को दर्शाता है। भागवत के अनुसार, उनका जीवन और मानसिक दृढ़ता आज भी अध्ययन और प्रेरणा का विषय है।

कार्यक्रम में फिल्म ‘शतक’ से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। गीतों को अपनी आवाज देने वाले गायक सुखविंदर सिंह, फिल्म के निर्देशक आशीष मॉल, सह-निर्माता आशीष तिवारी के साथ-साथ संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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