महादेव के आंसू से जन्मा रुद्राक्ष, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

Rudraksha : रुद्राक्ष का नाम सुनते ही अक्सर साधु-संत और अघोरी इसे अपनी भक्ति और साधना के प्रतीक के रूप में धारण करते हुए नजर आते हैं। कई लोग इसे मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान की शक्ति बढ़ाने के लिए पहनते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई और क्यों इसे महादेव के आंसू कहा जाता है?

महादेव के आंसू से जन्मा रुद्राक्ष

पुराणों के अनुसार, जब महादेव ध्यान में लीन थे, तो उन्होंने मानव जीवन की पीड़ा और कष्टों को देखा। उनके आंसू धरती पर गिरे, और जहां-जहां ये आंसू गिरे, वहां रुद्राक्ष के वृक्ष उग आए। इसी वजह से इसे ‘रुद्र’ यानी शिव और ‘अक्ष’ यानी आंसू कहा जाता है। कई स्थानों पर इसे भगवान शिव की तीसरी आंख के स्वरूप में भी पूजा जाता है।

रुद्राक्ष क्या है?

रुद्राक्ष असल में Elaeocarpus ganitrus नामक वृक्ष का बीज है। इसका फल सूखने पर कठोर बीज निकलता है, जिसकी सतह पर प्राकृतिक खांचे या “मुख” बनते हैं। यह पेड़ मुख्य रूप से भारत, नेपाल और इंडोनेशिया में पाया जाता है। यह मानव निर्मित नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है, जिससे इसकी पवित्रता और महत्व बढ़ जाता है।

रुद्राक्ष के प्रमुख प्रकार और लाभ

  • एकमुखी रुद्राक्ष: अत्यंत दुर्लभ, धारण करने से आध्यात्मिक उन्नति और एकाग्रता बढ़ती है।
  • द्विमुखी रुद्राक्ष: शिव-शक्ति का प्रतीक, मानसिक शक्ति और स्थिरता प्रदान करता है।
  • त्रिमुखी रुद्राक्ष: अग्निदेव को प्रसन्न करता है, पहनने वाले की ऊर्जा और ओज बढ़ाता है।
  • चतुर्मुखी रुद्राक्ष: ब्रह्मा का प्रतीक, मोक्ष की प्राप्ति में सहायक।
  • पंचमुखी रुद्राक्ष: शिव का स्वरूप, आध्यात्मिक ज्ञान और शुभता लाता है।
  • षष्ठमुखी रुद्राक्ष: कार्तिकेय का प्रतीक, भय और डर से मुक्ति दिलाता है।
  • सप्तमुखी रुद्राक्ष: शुक्र ग्रह का प्रतीक, धन और संपत्ति में वृद्धि करता है।
  • अष्टमुखी रुद्राक्ष: अष्ट मातृकाओं का प्रतीक, नकारात्मक प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • नवमुखी रुद्राक्ष: नवशक्ति का प्रतीक, मां दुर्गा की कृपा प्रदान करता है।
  • बारह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष: भगवान शिव का प्रतीक, सुख-शांति और आनंद प्रदान करता है।

रुद्राक्ष न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसे पहनने से मानसिक शांति, ध्यान की क्षमता और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलती है। यही कारण है कि इसे शिव के आंसू और दिव्य मणि के रूप में पूजनीय माना जाता है।

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