नई दिल्ली/लक्जमबर्ग। भारत–लक्जमबर्ग संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक पहल के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयामों पर व्यापक चर्चा की।
बैठक में खास तौर पर वित्तीय सेवाओं, निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते संबंधों पर भी विचार साझा किए और आपसी सहयोग को और गहराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि लक्जमबर्ग नेतृत्व के साथ संवाद बेहद सकारात्मक रहा और भारत–ईयू संबंधों को मजबूत करने में लक्जमबर्ग के समर्थन के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया।
अपने लक्जमबर्ग दौरे के दौरान डॉ. जयशंकर वहां के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल सहित वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद कर उनसे जुड़े मुद्दों और अनुभवों पर चर्चा करेंगे।
गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 4 से 9 जनवरी 2026 तक फ्रांस और लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे के पहले चरण में वे फ्रांस पहुंचे थे, जहां उन्होंने ऊर्जा, व्यापार, संस्कृति और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया।
फ्रांस प्रवास के दौरान उन्होंने इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल से भेंट कर वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य और भारत के विकास प्रयासों पर चर्चा की। इसके साथ ही पेरिस में फ्रांस–इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स के युवा प्रतिभा कार्यक्रम में भाग लेकर भारत–फ्रांस सहयोग की अहमियत को रेखांकित किया।
इसके अलावा उन्होंने पेरिस में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में भी शिरकत की, जिसमें भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। यह कार्यक्रम भारत और फ्रांस के गहरे सांस्कृतिक रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है।
विदेश मंत्री की यह यूरोप यात्रा भारत के बहुआयामी कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।