स्वप्न के रहस्य से जुड़ा बिरझापुर का शनि मंदिर,यहां महिलायें भी  करती है पूजा अर्चना

  • शनि साधिका के संकल्प से हुई मंदिर की स्थापना

लोकतंत्र प्रहरी। दुर्ग जिले के धमधा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम बिरझापुर के तीर्थ शनि मंदिर की कथा बड़ी ही रोचक है।जिसके बारे में कहा जाता है कि,एक शनि साधिका को अक्सर सपने में एक काली शिला दिखाई देती थी लेकिन इस संकेत को वो समझ नहीं पा रही थी कि इस शिला के दिखाई देने का क्या महत्व है|

 एक दिन शनि दर्शन पाने को वो प्राचीन शनि मंदिर में पहुंची और यहां वहां देखते हुवे उनकी नजर दीवार पर लगी  शिंगणापुर के शनि मंदिर की तस्वीर पर पड़ी जिसे देखते ही स्वप्न का रहस्य व शनि देव का संकेत उन्हें समझ आ गया और शनि साधिका महाराष्ट्र  के शिंगणापुर में स्थित शनि मंदिर पहुंची। लेकिन वहां पहुंचने के बाद भी शनि पूजा की अभिलाषा अधूरी ही रह गई।तभी उन्होंने शनि मंदिर की स्थापना का संकल्प लिया।

दरअसल शिंगणापुर के शनि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है  जिसके पीछे ऐसा कहा जाता है कि शनि देव की पत्नी माता नीलादेवी ने शनि देव को आंखों से ही देख लिया था, जिससे वे गर्भवती हो गईं। लेकिन शनि देव ने उन्हें आंखों से देखना बंद कर दिया, जिससे उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा हो गया। इस कारण माता नीलादेवी ने शनि देव को श्राप दिया कि जो भी स्त्री उनकी पूजा करेगी, वह अशुभ फल पाएगी।

यही वजह है कि शिंगणापुर के शनि मंदिर में शिला के समीप महिलाओं को प्रवेश नहीं दिया जाता शनि दर्शन से वंचित हुई शनि साधिका विभा श्री  ने संकल्प लिया कि उनके द्वारा निर्मित किए जाने वाले मंदिर में सनातन धर्म का पालन करते हुवे सभी को प्रवेश दिया जाएगा । शनि साधिका विभा श्री  का यह संकल्प 1987 को पूर्ण पूर्ण हुआ जब बिरझापुर के तीर्थ शनि मंदिर की स्थापना हुई।

इस विषय पर लोकतंत्र प्रहरी से चर्चा करते हुए  पंडित  रवि शर्मा ने बताया कि, भगवान शनि देव की शिला खुले आसमान के नीचे रहने की भी अपनी ही कथा है शनि देव भगवान सूर्य और छाया के पुत्र हैं, और उनकी माता छाया ने, उन्हें धूप से बचाने के लिए हमेशा अपने साथ रखा था। इस कारण शनि देव का रंग काला पड़ गया शनि देव की शिला काले रंग की होने का एक अन्य कारण यह भी है कि काला रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है, और शनि देव को शक्ति और ऊर्जा के देव के रूप में पूजा जाता है।

बिरझापुर के तीर्थ शनि मंदिर में शनि देव के साथ राहु केतु भी, शिला स्वरूप में विराजित है शनि देव को तेल, तिल और काले चावल चढ़ाकर पूजा जाता है ऐसा माना जाता है कि इन तीनों वस्तुओं को मिलाकर शनि देव की पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है, और जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।

आपको बता दें,बिरझापुर शनि मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां महिला और पुरुष संयुक्त रूप से पूजा में हिस्सा लेते है जो इसे अन्य शनि मंदिरों से अलग बनाता है बिरझापुर शनि मंदिर में शनि दोष , शनि की साढ़ेसाती, और ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए भी विशेष पूजा की जाती है यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से लोग शनि की विशेष कृपा पाने यहां आते है।

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