सावन की पुत्रदा एकादशी पर बन रहा खास संयोग, शिव-विष्णु की पूजा से संतान सुख की कामना

नई दिल्ली: सावन मास अब अंतिम चरण में है और इसी दौरान पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी को इस बार धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की आराधना का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है।

30 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, इस बार पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा। रविवार के दिन एकादशी पड़ना भी धार्मिक दृष्टि से शुभ संयोग माना जा रहा है। उनके मुताबिक इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है। वहीं सावन के कारण भगवान शिव की पूजा भी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए खास

पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जो संतान की कामना रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु तथा भगवान शिव की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी हो सकती है। इसके अलावा जरूरतमंदों को दान देना, दीप प्रज्वलित करना और भगवान का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

हालांकि, संतान प्राप्ति से जुड़ी ऐसी मान्यताओं को धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पूजा और पारण का समय

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त 2026 की सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक का समय बताया गया है।

व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक किया जा सकेगा। श्रद्धालुओं को पूजा और पारण के समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

शिव-विष्णु की आराधना से बढ़ेगा धार्मिक महत्व

सावन में भगवान शिव की भक्ति और पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का संयोग इस पर्व को और खास बना रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दोनों देवताओं की श्रद्धा से आराधना करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

पुत्रदा एकादशी के अवसर पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान शिव और विष्णु का ध्यान कर अपनी मनोकामना प्रकट कर सकते हैं और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

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