नई दिल्ली: वर्ष 2026 हिंदू पंचांग में खास रहेगा, क्योंकि इस साल ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। इसमें एक सामान्य ज्येष्ठ महीना होगा और दूसरा अधिक ज्येष्ठ (अधिकमास या मलमास)। इस कारण ज्येष्ठ की कुल अवधि लगभग 58-59 दिनों की होगी।
विक्रम संवत 2082 में अभी फाल्गुन माह चल रहा है, जबकि आने वाले वर्ष 2083 में कुल 13 महीने होंगे। पंचांग के अनुसार, अधिकमास 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा, जबकि सामान्य ज्येष्ठ मास 22 मई से 29 जून 2026 तक होगा।
अधिकमास का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह समय आत्मचिंतन, आध्यात्मिक साधना और मनोशुद्धि के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस माह में विष्णु भक्ति, जप, पाठ, दान और सात्त्विक आचरण का विशेष महत्व है। हालांकि परंपरा के अनुसार, अधिकमास में विवाह, गृह प्रवेश या संपत्ति खरीदने जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
इस दुर्लभ योग का कारण सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच का अंतर है। लगभग हर 32 महीने 16 दिन में चंद्र-सौर कैलेंडर का अंतर संतुलित करने के लिए पंचांग में अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। इसे ही अधिकमास कहा जाता है और यह चक्र लगभग हर तीसरे वर्ष दोहराया जाता है।
2026 का यह अधिकमास इसलिए धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्य और शुभ माना जाता है।