नई दिल्ली | देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि सुरक्षित सड़कें हर नागरिक का अधिकार हैं और इसे सुनिश्चित करना सरकार तथा संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।
हाल के महीनों में हुए गंभीर सड़क हादसों पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और देशभर में एक समान सुरक्षा मानक लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि लापरवाही और अव्यवस्थित व्यवस्थाएं दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही हैं, जिसे अब तत्काल सुधारा जाना चाहिए।
निर्देशों के तहत अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनियंत्रित रूप से वाहन खड़ा करने पर सख्ती की जाएगी। केवल निर्धारित स्थानों पर ही पार्किंग की अनुमति होगी और नियम तोड़ने वालों पर तकनीक आधारित निगरानी के जरिए कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने हाईवे किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को भी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण मानते हुए इन्हें हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही, नए अनधिकृत निर्माण पर रोक लगाने को कहा गया है ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं का खतरा कम हो।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक जिले में विशेष निगरानी तंत्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें प्रशासन, पुलिस और राजमार्ग प्रबंधन से जुड़े अधिकारी शामिल रहेंगे। यह टीम नियमित निरीक्षण कर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करेगी।
आपात स्थितियों से निपटने के लिए राजमार्गों पर तय दूरी पर एंबुलेंस और राहत उपकरण उपलब्ध कराने की बात कही गई है, ताकि दुर्घटना के बाद तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जैसे बेहतर रोशनी, निगरानी कैमरे और चेतावनी संकेत लगाने पर जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है, जिसे कम करने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। अदालत ने सभी संबंधित एजेंसियों से तय समय सीमा में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी की जा सके।