अब फ़ुर्सत कहाँ किसी को किसी से बात की,बस यही एक जगह बची है मुलाक़ात की :  डॉ. अरुण मिश्रा

डॉ. अरुण मिश्रा लोकतन्त्र प्रहरी के दैनिक पाठक द्वारा भेजे गए पत्र से.. अब फ़ुर्सत कहाँ…