नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच नई सैटेलाइट तस्वीरों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्धविराम और परमाणु प्रतिबद्धताओं से जुड़े समझौते के कुछ ही समय बाद ईरान ने अपने कुछ संवेदनशील परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर फिर से गतिविधियां शुरू कर दी हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के साथ किए गए सैटेलाइट विश्लेषण में संकेत मिले हैं कि ईरान कुछ संदिग्ध परमाणु स्थलों के पुनर्निर्माण में जुटा हुआ है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम समझौते को समाप्त मान चुके हैं और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुके हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तेहरान के निकट स्थित पारचिन सैन्य परिसर में दोबारा निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में बमबारी से बने गड्ढों को अस्थायी ढांचों से ढकने और बाद में वहां लोहे की संरचनाएं लगाने के संकेत मिले हैं, जिससे मरम्मत कार्य जारी होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र की सुरंगों के आसपास कई वाहनों की आवाजाही भी सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने का दावा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिविधियां परमाणु ढांचे से जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्फहान, फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों पर नए निर्माण के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, कुछ मिसाइल भंडारण केंद्रों पर मरम्मत और पुनर्सक्रियता से जुड़ी गतिविधियां देखे जाने का दावा किया गया है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मान रहे हैं।
हालिया युद्धविराम समझौते में दोनों देशों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने, समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परमाणु गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने पर सहमति जताई थी। ईरान ने यह भी आश्वासन दिया था कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग जारी रखेगा।
फिलहाल ईरान ने CNN की रिपोर्ट में किए गए दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, रिपोर्ट में शामिल सैटेलाइट विश्लेषण की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी तक नहीं हो सकी है, जिससे इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष निकलना बाकी है।