अमेरिकी | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को तत्काल परमाणु हथियारों के परीक्षण की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि अब समय आ गया है जब अमेरिका को रूस और चीन की बराबरी पर खड़ा होना चाहिए। गौरतलब है कि अमेरिका ने अपना आखिरी परमाणु परीक्षण 1992 में किया था।
बुधवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म *ट्रुथ सोशल* पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अन्य देशों द्वारा किए जा रहे परमाणु परीक्षणों को देखते हुए उन्होंने “डिपार्टमेंट ऑफ वॉर” को तुरंत परीक्षण प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। उन्होंने अपने बयान में विशेष रूप से रूस और चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में रूस दूसरे स्थान पर और चीन तीसरे स्थान पर है, लेकिन आने वाले पांच वर्षों में दोनों देश बराबरी पर पहुंच सकते हैं।
ट्रंप की यह घोषणा उस वक्त आई है जब वे दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
ध्यान देने योग्य है कि 1996 में “कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी” (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि अमेरिका और चीन ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन अब तक इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।
पूर्ण परमाणु परीक्षणों में वास्तविक बम विस्फोट के माध्यम से उसकी शक्ति, तकनीकी सटीकता और विकिरण प्रभाव का आकलन किया जाता है। इस प्रक्रिया से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना होती है।
अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने परीक्षणों पर रोक लगा दी थी। रूस और चीन ने भी 1990 के दशक के बाद से अपने परीक्षण स्थगित कर दिए थे।
अब ट्रंप की इस घोषणा से एक बार फिर विश्व स्तर पर परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू होने की आशंका गहराने लगी है।