वाराणसी: काशी, जिसे भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, अपनी धार्मिक विविधता और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। शहर के सिद्धेश्वरी मोहल्ले में स्थित चंद्रकूप मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी मंदिर है, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना है और इसे चंद्रकूप मंदिर तथा चंदेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर मां दुर्गा के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां विराजमान मां की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। मंदिर के गर्भगृह में मां के साथ चांदी के शिवलिंग के रूप में भगवान सिद्धेश्वर महादेव विराजमान हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु और छोटे परिसर में शिवलिंग भी मौजूद हैं।
मंदिर का सबसे चमत्कारी हिस्सा है चंद्रकूप। यह कुआं अन्य कुओं से अलग माना जाता है और इसे लेकर ऐसी मान्यता है कि कुएं में झांक कर भक्त अपनी जीवन और मृत्यु की भविष्यवाणी जान सकते हैं।

माना जाता है कि यदि कुएं में भक्त का प्रतिबिंब दिखाई देता है, तो उसकी उम्र लंबी होगी। लेकिन अगर प्रतिबिंब नहीं दिखता, तो यह आने वाले 6 महीनों में मृत्यु का संकेत माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस स्थिति में रोजाना कुएं के पास भगवान का नाम जपने से मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
कुएं को लेकर किंवदंती है कि इसे चंद्र देव ने स्वयं बनवाया था और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इसमें अद्भुत शक्ति प्रदान की। सोमवार, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन हजारों श्रद्धालु इस कुएं और मंदिर में जल से पूजा कर अपने दुख और बीमारियों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करते हैं।
चंद्रकूप मंदिर, अपनी प्राचीनता और रहस्यमयी कूँए के कारण, काशी के अनगिनत मंदिरों में एक विशेष स्थान रखता है।