CG विधानसभा मानसून सत्र का आज अंतिम दिन: अविश्वास प्रस्ताव पर होगी आर-पार की लड़ाई, CAG रिपोर्ट भी होगी पेश

रायपुर, 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज (17 जुलाई) पांचवां और अंतिम दिन है। अंतिम दिन सदन में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म रहने के आसार हैं। प्रश्नकाल, शासकीय एवं अशासकीय कार्यों के साथ कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा आज की कार्यवाही का सबसे अहम मुद्दा रहेगा। इसके अलावा वित्त मंत्री ओपी चौधरी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखेंगे।

प्रश्नकाल के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा खाद्य मंत्री दयालदास बघेल विधानसभा सदस्यों के सवालों के जवाब देंगे। वहीं विधायक गोमती साय, धर्मजीत सिंह और भैयालाल राजवाड़े विभिन्न समितियों के प्रतिवेदन भी सदन में प्रस्तुत करेंगे।

अविश्वास प्रस्ताव पर होगी अहम बहस

कांग्रेस ने मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्वीकार करते हुए अंतिम दिन चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करेंगे, जिसके बाद सत्ता पक्ष अपनी बात रखेगा।

राज्य गठन के बाद यह छत्तीसगढ़ विधानसभा में लाया गया दसवां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले आए सभी नौ अविश्वास प्रस्ताव बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सके थे। ऐसे में आज की बहस राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गुरुवार को भी गरमाया था सदन

गौरतलब है कि गुरुवार को विधानसभा में फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योगों को जमीन आवंटित किए जाने का मामला जोरदार ढंग से उठा था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्वीकार किया था कि रायपुर जिले के ग्राम अल्दा में ग्रामसभा प्रस्ताव में कथित जालसाजी की शिकायत मिली है। इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

विपक्ष ने उद्योग के लिए किए गए भूमि आवंटन को निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया था। वहीं इसी दौरान विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 भी पारित कर दिया था।

आज मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव, CAG रिपोर्ट और विभिन्न मुद्दों पर होने वाली बहस के कारण सदन में तीखी राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना है।

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