न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान को लेकर सख्त रुख दोहराया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने ईरान पर आतंकवाद को समर्थन देने और मध्य-पूर्व में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उसके खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपील की।
ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिका की सैन्य, आर्थिक और तकनीकी क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका देश पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके प्रशासन ने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है।
ईरान के खिलाफ पूर्ण आर्थिक अलगाव की अपील
ट्रंप ने कहा कि ईरान को तब तक अलग-थलग रखा जाना चाहिए, जब तक वह वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने, अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने और आतंकवाद के समर्थन को खत्म करने की दिशा में कदम नहीं उठाता। उन्होंने ईरान को लेकर अमेरिकी नीति को स्पष्ट बताते हुए कहा कि वह उसे परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
ट्रंप ने ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर होने का दावा भी किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक ईरान को मध्य-पूर्व में एक प्रभावशाली शक्ति माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का भी उल्लेख किया। ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत आठ संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इन मामलों में व्यक्तिगत संबंधों, व्यापारिक रिश्तों, टैरिफ और टैरिफ लगाने की चेतावनी का इस्तेमाल किया गया था।
ट्रंप ने गाजा और यूक्रेन का भी जिक्र किया। उन्होंने गाजा में संघर्ष और बंधकों से जुड़े घटनाक्रम को लेकर अमेरिकी भूमिका का दावा किया और कहा कि यूक्रेन युद्ध को भी उनकी उम्मीद से कम समय में समाप्त किया जा सकता है।
बातचीत का रास्ता भी खुला
ईरान को लेकर सख्त बयानबाजी के बीच अमेरिका ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए तैयार है, हालांकि फिलहाल ऐसी कोई बैठक तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी उपयोगी होगी, जब उससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके।
ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों के सभागार से बाहर चले जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बरकरार
81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत को लेकर संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है। Reuters के मुताबिक, ईरान की ओर से भी बातचीत की संभावनाओं के संकेत दिए गए हैं, जबकि अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखने की बात कही है।
ऐसे में ट्रंप के UN भाषण ने एक तरफ ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव की नीति को स्पष्ट किया है, तो दूसरी तरफ संभावित बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है।