तेहरान : ईरान ने अमेरिका के 14 सूत्रीय प्रस्ताव को खारिज कर नया मसौदा प्रस्ताव वाशिंगटन को भेज दिया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए मसौदे को भी सिरे से नकार दिया। इस पर भारत स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि अमेरिका की योजना के जवाब में ईरान ने ऐसा प्रस्ताव पेश किया है, जो देश के मूल अधिकारों पर आधारित है। दूतावास के अनुसार, यदि तेहरान अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लेता तो इसका अर्थ होता कि ईरान ट्रंप की अत्यधिक मांगों के आगे झुक गया।
दूतावास ने आगे कहा कि ईरान के प्रस्ताव में अमेरिका से युद्ध का मुआवजा देने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। साथ ही प्रतिबंध समाप्त करने और जब्त की गई ईरानी संपत्तियों व धनराशि को वापस लौटाने की बात भी कही गई है।
वहीं घाना स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति दावा करते हैं कि उन्होंने दस्तावेज पढ़ा है, लेकिन उसकी असली भावना अब भी उनकी समझ से बाहर है। इसके बावजूद वे यह कहने में पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उन्हें वह पसंद नहीं आया।
दूतावास ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ट्रंप केवल वैश्विक ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि व्हाइट हाउस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक उनका पूरा कार्यकाल एक “अरबों डॉलर का मनोवैज्ञानिक उपचार सत्र” बनकर रह गया है।
दरअसल, ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था कि उन्होंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है, लेकिन उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया।
ईरान के सरकारी प्रसारक ईरान का सरकारी प्रसारण संगठन ने भी कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव का मतलब ईरान का ट्रंप की शर्तों के आगे समर्पण करना होता, जबकि तेहरान का जवाब देश के बुनियादी अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित है।