वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई गंभीर दावे करते हुए एक बार फिर तेहरान पर दबाव बढ़ाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने ईरानी जेलों में बंद महिलाओं और युवतियों के साथ कथित यौन हिंसा और दुर्व्यवहार से जुड़ी एक रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा की। हालांकि, ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है।
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर ‘द जेरूसलम पोस्ट’ की एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी जेलों में हिरासत में रखी गई महिलाओं और युवतियों के साथ पूछताछ के दौरान कथित हमले और सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का दावा
ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अब पूरी तरह अमेरिका का नियंत्रण है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई समझौता स्वीकार करने के लिए अमेरिका तैयार नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और इसके आसपास तनाव बढ़ने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि ईरान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उसके पास पुलिस तथा सैन्य कर्मियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास प्रभावी नौसेना और वायुसेना नहीं है तथा देश में महंगाई दर 350 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हालांकि, ये दावे अमेरिकी राष्ट्रपति के हैं और इनके सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
परमाणु हथियार को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप ने अपना कड़ा रुख दोहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने या रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रंप पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि यदि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल होता है तो इससे इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए खतरा बढ़ सकता है। इसी के साथ अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और नए प्रतिबंध लगाने की धमकी भी देता रहा है।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को बताया विफल
ट्रंप के बयानों के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी आर्थिक दबाव अभियान पर पलटवार किया। उन्होंने अमेरिका की रणनीति को पुराना और विफल बताते हुए कहा कि ईरान पहले भी इस तरह के प्रतिबंधों और दबाव का सामना कर चुका है।
अराघची ने दावा किया कि करीब 14 साल पहले लगाए गए कड़े प्रतिबंध विफल रहे। इसके बाद आठ साल पहले लागू की गई ‘अधिकतम दबाव’ की नीति भी अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण कराने की कोशिश भी नाकाम रही।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अब तक के सबसे बड़े आर्थिक दबाव अभियान के भी विफल होने की संभावना है। उनके मुताबिक, अमेरिका की धमकी और आर्थिक दबाव की नीति पुरानी है, भले ही इस बार इसे लागू करने वाले लोग अलग हों।