नई दिल्ली। भारत की डिजिटल क्रांति ने बीते एक दशक में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, 10 वर्ष पहले एक साधारण डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुआ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज देश के रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन की रीढ़ बन चुका है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई के जरिए केवल 2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक पहुंच गया।
फैक्टशीट में बताया गया कि जन धन, आधार और मोबाइल (JAM ट्रिनिटी) ने भारत में वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है। इस पहल ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाना संभव बनाया है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत बैंकिंग सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। मार्च 2015 में जहां 14.72 करोड़ जन धन खाते थे, वहीं फरवरी 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 57.78 करोड़ हो गई। इसी अवधि में इन खातों में जमा राशि 15,670 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
डिजिटल पहचान के क्षेत्र में भी आधार ने बड़ी भूमिका निभाई है। वर्ष 2010-11 में केवल 0.42 करोड़ आधार नामांकन हुए थे, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 144 करोड़ से अधिक हो गए। इससे डिजिटल प्रमाणीकरण अधिक सुरक्षित, तेज और आसान हुआ है।
फैक्टशीट के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश के 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन था, जबकि 109 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे थे। इससे डिजिटल सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक मजबूत हुई है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) भी डिजिटल इंडिया की बड़ी सफलता बनकर उभरा है। जून 2026 तक 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि 176 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे भेजी जा चुकी है। इससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका काफी कम हुई है।
डिजिटल दस्तावेजों के क्षेत्र में डिजिलॉकर ने भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 70.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं। इससे दस्तावेजों का सत्यापन तेज, सुरक्षित और पूरी तरह कागजरहित हुआ है।
वहीं, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। जून 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 18.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सकल व्यापार मूल्य (GMV) दर्ज किया गया, जिसमें केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 5 लाख करोड़ रुपये का कारोबार शामिल है। इस मंच के जरिए 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सरकारी खरीद प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला है।
फैक्टशीट के अनुसार, UPI, JAM ट्रिनिटी, DBT, डिजिलॉकर और GeM जैसी पहलों ने मिलकर भारत में डिजिटल गवर्नेंस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और देश को समावेशी, पारदर्शी तथा तकनीक-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाया है।