कोलकाता। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति उबाल पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा टकराव अब सड़कों से निकलकर अदालतों तक जा पहुंचा है। कोयला घोटाले और हवाला लेन-देन से जुड़े एक मामले में ED द्वारा तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी चुनावी रणनीति संभालने वाली एजेंसी के ठिकानों पर छापेमारी किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आए।
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही छापेमारी की सूचना मुख्यमंत्री तक पहुंची, ममता बनर्जी स्वयं बड़ी संख्या में समर्थकों और सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंच गईं। ED का आरोप है कि इस दौरान जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक सामग्री वहां से हटा ली गई, जो मामले में अहम सबूत हो सकते थे।
इस कार्रवाई के विरोध में मुख्यमंत्री ने अगले ही दिन कोलकाता की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन किया। हजारों समर्थकों के साथ निकाली गई रैली में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने और दबाने के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप था कि जांच के नाम पर राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
कलकत्ता हाई कोर्ट में तनावपूर्ण माहौल
राजनीतिक विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वकीलों और पक्षों के बीच तीखी बहस और शोर-शराबे के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई कि न्यायालय की कार्यवाही बाधित हो गई। हालात को देखते हुए जस्टिस सुव्रा घोष को बीच में ही सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे वातावरण में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। अब अवकाश के बाद इस मामले पर अगली सुनवाई तय की गई है।
राजनीतिक रणनीति एजेंसी बनी विवाद की जड़
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक राजनीतिक सलाहकार संस्था और उसके प्रमुख हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के चुनावी अभियान की रणनीति तैयार कर रहे हैं। ED का दावा है कि इस संस्था को अवैध स्रोतों से फंडिंग मिली है, जिसकी जांच की जा रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जांच एजेंसी का असली मकसद उनकी चुनावी तैयारियों और रणनीतिक दस्तावेजों तक पहुंच बनाना है।
ED ने अब इस मामले में मुख्यमंत्री द्वारा जांच में हस्तक्षेप के आरोपों की अलग से जांच कराने की मांग उठाई है, जिससे केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।