वैशाख दुर्गाष्टमी 2026: व्रत-पूजा की पूरी विधि और जरूरी नियम

नई दिल्ली | वैशाख माह की मासिक दुर्गाष्टमी आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ने वाला यह पावन पर्व देवी दुर्गा की आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मां भवानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व

माना जाता है कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की उपासना करने से घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उन्हें एक प्रकार का आध्यात्मिक सुरक्षा कवच प्राप्त होता है। ज्योतिष और धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन की गई पूजा से करियर और जीवन में उन्नति के योग भी बनते हैं।

पूजा की विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित की जाती है।
माता को लाल चुनरी और सोलह शृंगार अर्पित किए जाते हैं। भोग के रूप में हलवा-पूरी, काले चने, खीर, फल और मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।

शक्तिशाली मंत्रों का जप

पूजा के दौरान भक्त विशेष मंत्रों का जप करते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • ॐ दुं दुर्गायै नमः
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
  • ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्
  • ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः

इन मंत्रों के जप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।

रखें ये सावधानियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत और पूजा करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज से दूर रहना चाहिए। पूजा के समय काले वस्त्र पहनने से बचें और क्रोध, झूठ व अपमानजनक व्यवहार से दूर रहें। ब्रह्मचर्य का पालन करना और संयमित जीवन शैली अपनाना भी लाभकारी माना गया है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम को माता की आराधना के बाद गेहूं और गुड़ से बने प्रसाद के साथ व्रत खोलते हैं।

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