Anant Chaturdashi 2026 : हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और संकटों से रक्षा होती है।
अनंत चतुर्दशी के दिन पूजन का मुहूर्त सुबह 6:28 बजे से रात 11:06 बजे तक बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है। वहीं, इसी दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है और विभिन्न स्थानों पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
14 गांठों वाले अनंत सूत्र की मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर भगवान अनंत की पूजा करने के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है। इस सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि अनंत सूत्र धारण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति संकटों से सुरक्षित रहता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना राज्य और राज-पाट हारकर वनवास के दौरान कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ विधि-विधान से व्रत किया और अनंत सूत्र धारण किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके प्रभाव से पांडवों के संकट दूर हुए।
ऐसे करें अनंत चतुर्दशी की पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शास्त्रीय परंपरा में पवित्र नदी या सरोवर के तट पर संकल्प और पूजन का विधान बताया गया है। यदि ऐसा संभव न हो तो घर के पूजा स्थल पर स्वच्छ स्थान में कलश स्थापित कर पूजा की जा सकती है।
कलश पर शेषनाग की शैय्या पर विराजमान भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके सामने 14 गांठों वाला अनंत सूत्र रखें। इसके बाद ‘ॐ अनन्ताय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की विधि-विधान से पूजा करें।
पूजा के बाद मंत्रोच्चार के साथ पुरुष दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र धारण करती हैं। इसके बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित कर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।
गणेश उत्सव का भी होगा समापन
अनंत चतुर्दशी के दिन 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन भी होता है। गणेश चतुर्थी से घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं का इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाता है।
इस तरह 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, अनंत सूत्र धारण करने और कई स्थानों पर गणपति विसर्जन के आयोजन होंगे।