Bitter taste in mouth : अक्सर सुबह की शुरुआत ऊर्जा और ताजगी से होती है, क्योंकि रात के समय शरीर खुद को रिपेयर करता है। लेकिन अगर आंख खुलते ही मुंह में खट्टापन या कड़वाहट महसूस हो, तो यह सामान्य बात नहीं मानी जाती। कभी-कभार ऐसा होना अलग बात है, लेकिन रोजाना ऐसा हो रहा है तो यह शरीर के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी का इशारा हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि मुंह की अधिकांश समस्याओं की जड़ पेट से जुड़ी होती है। जब पाचन तंत्र सही ढंग से काम नहीं करता, तो उसका असर सबसे पहले मुंह के स्वाद पर दिखाई देता है। लगातार खट्टा या कड़वा स्वाद इस बात का संकेत हो सकता है कि पेट में अम्ल की मात्रा बढ़ चुकी है।
आधुनिक चिकित्सा इसे एसिड रिफ्लक्स या गैस्ट्रिक समस्या से जोड़कर देखती है, जबकि आयुर्वेद में इसे पित्त दोष की वृद्धि माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में पित्त असंतुलित हो जाता है, तो अम्ल बढ़ने लगता है। इसका असर केवल पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जोड़ों, हड्डियों और संपूर्ण ऊर्जा स्तर पर भी पड़ता है।

इस परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं—
देर रात भोजन करना, तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब या तंबाकू का सेवन, लंबे समय तक खाली पेट रहना, कमजोर पाचन शक्ति, लिवर का ठीक से काम न करना और मानसिक तनाव। खासतौर पर तनाव की स्थिति में पेट सामान्य से कहीं अधिक एसिड बनाता है।
आयुर्वेद में इस समस्या से राहत के लिए प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। त्रिफला चूर्ण पाचन को सुधारने और पित्त को संतुलित करने में मदद करता है। रात को गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच त्रिफला लेने से सुबह पेट साफ रहता है और अम्ल की समस्या कम होती है।
इसके साथ-साथ खान-पान की आदतों में बदलाव बेहद जरूरी है। देर रात भोजन करने से बचें और कोशिश करें कि सूर्यास्त के आसपास ही खाना खा लिया जाए। भोजन के तुरंत बाद लेटने की बजाय कुछ देर टहलें और सोते समय बाईं करवट लेटें। वैज्ञानिक शोध भी मानते हैं कि बाईं करवट सोने से पेट का एसिड ऊपर की नली में नहीं जाता।
तांबे के बर्तन में रखा पानी भी पेट के लिए लाभकारी माना जाता है। रातभर रखा गया तांबे का पानी सुबह पीने से शरीर डिटॉक्स होता है और पेट की गर्मी शांत होती है।
इसके अलावा, सौंफ और मिश्री का सेवन या उनका पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और मुंह की दुर्गंध भी कम होती है। सबसे अहम बात—तनाव और चिंता से दूरी बनाएं। शांत मन न सिर्फ दिमाग को राहत देता है, बल्कि पेट को भी स्वस्थ रखता है।
अगर इन उपायों के बावजूद समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि लगातार मुंह का कड़वा या खट्टा स्वाद किसी गंभीर पाचन समस्या का संकेत भी हो सकता है।