रेलवे स्टेशन पर दुकान खोलकर कर सकते हैं कारोबार, जानिए टेंडर से लाइसेंस तक की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर चाय, नाश्ता, किताबें और रोजमर्रा का सामान बेचने वाले स्टॉल यात्रियों के लिए आम दृश्य हैं। लेकिन इनमें से कई स्टॉल रेलवे द्वारा सीधे संचालित नहीं किए जाते, बल्कि निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के जरिए निजी संचालकों को लाइसेंस पर दिए जाते हैं। इच्छुक भारतीय नागरिक रेलवे के नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करके इन स्टॉल के लिए आवेदन कर सकते हैं।

टेंडर के जरिए मिलता है स्टॉल

रेलवे स्टेशनों पर फूड स्टॉल, चाय-कॉफी बूथ, जनरल स्टोर और बुक स्टॉल सहित कई तरह के कारोबार के लिए समय-समय पर टेंडर जारी किए जाते हैं। इच्छुक आवेदक रेलवे के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल, IRCTC या संबंधित रेलवे जोन के आधिकारिक टेंडर और ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध निविदाओं की जानकारी देख सकते हैं।

टेंडर की शर्तों में पात्रता, लाइसेंस अवधि, शुल्क, सुरक्षा राशि और स्टॉल से संबंधित नियमों की जानकारी दी जाती है। आवेदक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन बोली जमा करनी होती है।

लाइसेंस की अवधि टेंडर पर निर्भर

स्टॉल या कैटरिंग यूनिट का लाइसेंस कितने समय के लिए मिलेगा, यह संबंधित टेंडर की शर्तों पर निर्भर करता है। अलग-अलग कैटरिंग यूनिट और स्टेशन सुविधाओं के लिए लाइसेंस की अवधि अलग हो सकती है। अवधि पूरी होने के बाद रेलवे के नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?

टेंडर में आवेदन करने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी संबंधित निविदा में निर्धारित किए जाते हैं। इनमें पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज, PAN, डिजिटल सिग्नेचर और अन्य कारोबारी दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। खाद्य पदार्थों से संबंधित स्टॉल के लिए FSSAI लाइसेंस जैसी वैधानिक मंजूरी भी आवश्यक हो सकती है।

इसके अलावा टेंडर में निर्धारित EMD यानी Earnest Money Deposit और अन्य शुल्क जमा करना पड़ सकता है। इसकी राशि स्टेशन, स्टॉल के प्रकार और टेंडर की शर्तों के अनुसार अलग-अलग होती है।

बड़े स्टेशनों पर अधिक प्रतिस्पर्धा

रेलवे स्टॉल का कारोबार यात्रियों की संख्या और स्टेशन की श्रेणी पर काफी निर्भर करता है। बड़े और व्यस्त स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण ऐसे टेंडर में प्रतिस्पर्धा भी अधिक हो सकती है। हालांकि, किसी स्टॉल से होने वाली कमाई तय नहीं होती और यह बिक्री, लाइसेंस शुल्क, किराया, सामान की लागत और अन्य खर्चों पर निर्भर करती है।

इसलिए रेलवे स्टेशन पर स्टॉल लेने के इच्छुक लोगों को किसी भी टेंडर में आवेदन करने से पहले IRCTC और संबंधित रेलवे जोन की आधिकारिक निविदा में दी गई पात्रता, शुल्क, लाइसेंस अवधि और अन्य शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

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