34 जहाज अब भी इंतजार में, भारत जा रहे LNG पोत के होर्मुज पार करने से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली। भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आने वाला एलएनजी (LNG) वाहक जहाज ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से गुजर गया है, जिससे फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों के भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित पहुंचने की उम्मीद बढ़ गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहाज ‘दिशा’ के सुरक्षित मार्ग पार करने से समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि नीति निर्माता अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया के कई ऊर्जा केंद्रों को संघर्ष के दौरान नुकसान पहुंचा है।

ऊर्जा क्षेत्र में तत्काल राहत की संभावना कम

अधिकारियों के अनुसार, कतर के रास लाफान गैस केंद्र और संयुक्त अरब अमीरात के हबशान गैस प्लांट को हुए नुकसान के कारण ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। भारत का कतरएनर्जी के साथ दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौता है और रास लाफान सुविधा देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जानकारी के मुताबिक, रास लाफान की दो एलएनजी प्रोसेसिंग यूनिट्स प्रभावित हुई हैं, जिससे उसकी लगभग 17 प्रतिशत उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। वहीं हबशान गैस प्लांट की करीब 60 प्रतिशत क्षमता बहाल कर दी गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इसकी 80 प्रतिशत क्षमता बहाल हो जाएगी, जबकि पूर्ण बहाली 2027 तक संभव है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों पर असर

संघर्ष शुरू होने से पहले भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता था, जिसमें लगभग आधी आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती थी। इसके अलावा भारत के कुल एलएनजी आयात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता था।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है और इसमें से करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग का सुचारु संचालन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

खाड़ी में अब भी फंसे हैं कई जहाज

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों में से 15 जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी लेकर चल रहे हैं, जबकि अन्य जहाज विभिन्न प्रकार के कार्गो से लदे हुए हैं। इनके सुरक्षित आवागमन पर भारत सहित कई देशों की नजर बनी हुई है।

18 जून को दाहेज पहुंच सकता है ‘दिशा’

जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि एलएनजी वाहक जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन एलएनजी कार्गो लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल चुका है। इसके 18 जून को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।

उर्वरक आपूर्ति को भी मिल सकती है राहत

उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव वंदना प्रेयशी ने बताया कि होर्मुज क्षेत्र में मौजूद 16 उर्वरक जहाजों में 8 जहाज यूरिया, 4 जहाज डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), 3 जहाज सल्फर और 1 जहाज अमोनिया लेकर भारत की ओर आ रहे हैं। इन जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से कृषि क्षेत्र के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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