नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार को हुए विधानसभा चुनावों ने मतदान के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए। बंगाल की 152 सीटों पर 92.54 प्रतिशत और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 84.69 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो आजादी के बाद के सबसे ऊंचे आंकड़ों में शामिल है। खास बात यह रही कि दशकों से चुनावी हिंसा के लिए चर्चित बंगाल में इस बार बड़े पैमाने पर शांति देखने को मिली और लगभग 50 वर्षों बाद चुनाव अपेक्षाकृत हिंसा-मुक्त रहे।
बंगाल में पहले चरण के दौरान 16 जिलों की सीटों पर मतदान हुआ, जहां मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह नजर आया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने लोगों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे। गर्मी और उमस के बावजूद लंबी कतारें शाम तक बनी रहीं।
महिलाओं और प्रवासी श्रमिकों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। चुनाव आयोग के मुताबिक, कई केंद्रों पर निर्धारित समय के बाद भी लोग वोट डालने के लिए खड़े रहे, जिससे अंतिम प्रतिशत और बढ़ने की संभावना जताई गई है।
राजनीतिक रूप से भी यह चरण अहम रहा, जिसमें कई प्रमुख नेताओं की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।
सुरक्षा के लिहाज से इस बार अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। हजारों केंद्रीय बलों की कंपनियां, क्विक रिस्पांस टीमें और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हालांकि कुछ स्थानों पर छिटपुट घटनाएं सामने आईं, लेकिन कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई।
तमिलनाडु में भी मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राज्य में 5.73 करोड़ मतदाताओं में से 84.69 प्रतिशत ने मतदान किया। करूर जिले में सबसे अधिक 91.86 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों में भी अच्छी भागीदारी दर्ज की गई।
राज्य की कई महत्वपूर्ण सीटों पर भी भारी मतदान हुआ, जिनमें प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। पिछले चुनावों की तुलना में इस बार मतदाता संख्या में कमी के बावजूद मतदान प्रतिशत अधिक रहा।
दिलचस्प बात यह है कि बंगाल के चुनावी इतिहास में जब-जब रिकॉर्ड मतदान हुआ है, तब-तब सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। ऐसे में इस बार का उच्च मतदान प्रतिशत राजनीतिक परिणामों को लेकर भी उत्सुकता बढ़ा रहा है।
कुल मिलाकर, दोनों राज्यों में शांतिपूर्ण माहौल, कड़ी सुरक्षा और जागरूकता ने लोकतंत्र के इस उत्सव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।