दुर्ग। दुर्ग नगर निगम में शुक्रवार को सत्ता और अफसरशाही के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। महापौर अलका बाघमार अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ दिखाई दीं और उन्होंने अपने चेंबर में तीन अधिकारियों को तलब कर कड़ी फटकार लगाई।
महापौर ने करीब दो घंटे तक अधिकारियों को अपने चेंबर में बैठाकर कार्यप्रणाली की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को बाहर नहीं आने दिया गया, जिससे निगम कार्यालय में हलचल का माहौल बन गया। लंबे समय तक अधिकारियों के बाहर नहीं आने पर स्थिति को लेकर पुलिस को भी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस निगम परिसर पहुंची।

खुले मंच से उठे थे सवाल
बता दें कि महापौर अलका बाघमार अधिकारियों के कामकाज से पहले से ही असंतुष्ट थीं। एक दिन पूर्व ही उन्होंने सार्वजनिक मंच से अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। महापौर का आरोप था कि नगर निगम क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी जाती, जो कि प्रशासनिक समन्वय की गंभीर कमी को दर्शाता है।
जवाबदेही का सख्त संदेश
महापौर का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को जानकारी से दूर रखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि निगम प्रशासन में लापरवाही और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे इस तरह की स्थिति दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे महापौर बनाम अफसरशाही के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि महापौर का यह सख्त रुख निगम प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा संदेश है, वहीं दूसरी ओर इससे प्रशासनिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।लेकिन महापौर के तेवरों से यह साफ है कि नगर निगम में अब ढिलाई नहीं, बल्कि जवाबदेही की राजनीति चलेगी।