नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के बुनियादी ढांचे और विमानन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने कुल 39,290 करोड़ रुपये के छह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का असर देश की परिवहन व्यवस्था, एविएशन सेक्टर और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी पर सीधे तौर पर देखने को मिलेगा।
विमानन क्षेत्र के लिए ₹10,000 करोड़ का राहत फंड
कैबिनेट ने विमानन टर्बाइन ईंधन (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से एयरलाइंस को राहत देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ को मंजूरी दी है। यह फंड घरेलू एयरलाइंस को ईंधन कीमतों के अस्थिर प्रभाव से बचाने में मदद करेगा।
सरकार ने एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखने के लिए 75.6 रुपये प्रति लीटर का स्तर तय किया है। इससे हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा और विमानन क्षेत्र में लगभग 77 लाख नौकरियों को सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में पुराने वाहनों की विदाई योजना
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने 5,041 करोड़ रुपये की स्क्रैपेज और विदाई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पुराने ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जाएगा, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।
हाईवे नेटवर्क के लिए ₹24,249 करोड़
कैबिनेट ने देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत करने के लिए सबसे बड़ा हिस्सा सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं को दिया है। कुल 24,249 करोड़ रुपये की लागत से चार प्रमुख राज्यों—ओडिशा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और बिहार—में हाईवे नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।
- ओडिशा में कोस्टल हाईवे परियोजना (रामेश्वर–कोणार्क–पारादीप) को 8,301 करोड़ रुपये
- तेलंगाना में NH-63 और NH-563 के फोर-लेन विस्तार को 7,597 करोड़ रुपये
- मध्य प्रदेश में NH-347B अपग्रेडेशन को 4,415 करोड़ रुपये
- बिहार में खगड़िया–पूर्णिया हाईवे सेक्शन को 3,936 करोड़ रुपये
अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के अनुसार इन छह परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, व्यापारिक परिवहन आसान होगा और देश के कई हिस्सों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, 39,290 करोड़ रुपये के ये फैसले भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आर्थिक ग्रोथ को नई गति देने वाले माने जा रहे हैं।