कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दिल्ली और कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालयों को लेकर नई प्रशासनिक और राजनीतिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान के बीच दोनों प्रमुख कार्यालयों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
दिल्ली में पार्टी का कार्यालय बैरकपुर से सांसद पार्थ भौमिक के सरकारी बंगले से संचालित किया जा रहा है। यह स्थान तृणमूल कांग्रेस की संसदीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। हालांकि, हाल ही में लोकसभा के लगभग 20 सांसदों के एक अलग गुट बनाने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है।
विद्रोही खेमे का दावा है कि पार्थ भौमिक भी उनके साथ हैं, जिससे इस बात पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह बंगला आगे भी टीएमसी के दिल्ली कार्यालय के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
उधर, कोलकाता स्थित तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालय को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। भवन के मालिक ने आरोप लगाया है कि किराये का समझौता 2025 में समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद परिसर खाली नहीं किया गया है। कई बार अनुरोध के बाद भी भवन वापस नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
इस मामले में पार्टी नेतृत्व ने भी पुलिस को पत्र लिखकर बताया है कि कार्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है और इस दौरान किसी तरह का अनावश्यक हस्तक्षेप न किया जाए।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में पुराने तृणमूल भवन के पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसी इमारत को अस्थायी मुख्यालय बनाया गया था। हालांकि, पुराना भवन अभी भी निर्माणाधीन है, ऐसे में वर्तमान परिसर खाली होने के बाद नया पार्टी कार्यालय कहां होगा, यह सवाल अभी अनुत्तरित है।