नई दिल्ली। बार-बार गुस्सा करना केवल मानसिक शांति ही नहीं छीनता, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। विभिन्न शोधों में सामने आया है कि जो लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाते, उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।
‘यूरोपियन हार्ट जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, गुस्से का तीव्र दौरा पड़ने के बाद अगले दो घंटों के भीतर हार्ट अटैक का खतरा लगभग पांच गुना और स्ट्रोक का खतरा करीब तीन गुना तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी अधिक बार और जितना तीव्र गुस्सा आता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, गुस्से के दौरान शरीर में कैटेकोलामाइन (Catecholamines) जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जो आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज का कारण बनती है। अचानक बढ़े ये हार्मोन हार्ट अटैक, जानलेवा हार्ट रिदम और स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी (ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम) जैसी गंभीर स्थितियां भी पैदा कर सकते हैं। यह समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
विशेषज्ञ गुस्से को नियंत्रित करने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। गुस्सा आने पर कुछ समय के लिए उस स्थिति से दूर हो जाना, 10 तक गिनती करना, गहरी सांस लेना और शांत होकर अपनी बात रखना मददगार हो सकता है। आक्रामक व्यवहार की बजाय संयमित और स्पष्ट संवाद अपनाने से तनाव कम होता है और रिश्तों पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
इसके अलावा मेडिटेशन, योग और माइंडफुलनेस जैसी तकनीकें मानसिक संतुलन बनाए रखने में प्रभावी मानी जाती हैं। यदि किसी व्यक्ति को जल्दी गुस्सा आता है, तो उसे ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य हृदय जोखिम कारकों की नियमित जांच करानी चाहिए। यदि पहले से हृदय रोग है या गुस्से पर नियंत्रण में कठिनाई होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित उपचार या काउंसलिंग लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
नोट: किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दवा के संबंध में स्वयं निर्णय लेने के बजाय योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।