नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और टिकट जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ट्रेनों में टिकट जांच करने वाले टिकट परीक्षक (TTE) अपनी यूनिफॉर्म पर बॉडी वॉर्न कैमरा पहनकर ड्यूटी करेंगे। टिकट जांच के दौरान यात्री और TTE के बीच होने वाली पूरी बातचीत वीडियो और ऑडियो के रूप में रिकॉर्ड होगी, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में सच्चाई का पता लगाना आसान होगा।
उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि इस नई व्यवस्था की शुरुआत फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की गई है। परियोजना सफल होने पर इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों और रेलवे जोनों में भी लागू किया जाएगा।
इन दो ट्रेनों में शुरू हुई नई व्यवस्था
रेलवे ने फिलहाल प्रयागराज मंडल की दो प्रमुख ट्रेनों में इस व्यवस्था की शुरुआत की है। इनमें 12417/12418 प्रयागराज एक्सप्रेस (प्रयागराज–नई दिल्ली–प्रयागराज) और 12451/12452 श्रम शक्ति एक्सप्रेस (कानपुर–नई दिल्ली–कानपुर) शामिल हैं।
पहले चरण में इन ट्रेनों के टिकट जांच स्टाफ को कुल 30 बॉडी कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं। कैमरों के उपयोग को लेकर कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
क्या है बॉडी वॉर्न कैमरे की खासियत?
बॉडी वॉर्न कैमरा एक छोटा डिजिटल कैमरा है, जिसे कर्मचारी अपनी यूनिफॉर्म पर पहनते हैं। यह टिकट जांच के दौरान पूरी प्रक्रिया की हाई-डेफिनिशन वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करता है।
इन कैमरों में नाइट विजन, लंबा बैटरी बैकअप और टैम्पर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जिससे रिकॉर्ड किए गए वीडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सके।
विवादों के समाधान में मिलेगी मदद
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कई बार टिकट जांच के दौरान यात्रियों और TTE के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में यह तय करना मुश्किल होता है कि गलती किसकी थी। बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग से ऐसे विवादों की निष्पक्ष जांच करने और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले मध्य रेलवे (CR) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के कुछ मंडलों में भी इस तकनीक का सफल परीक्षण किया जा चुका है। अब उत्तर मध्य रेलवे में इसे लागू किया गया है और परिणाम सकारात्मक रहने पर इसे धीरे-धीरे देशभर के रेलवे नेटवर्क में विस्तार दिया जाएगा।
रेलवे का मानना है कि यह पहल टिकट जांच व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और विश्वसनीय बनाएगी, साथ ही यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।