‘महुआ मोइत्रा को कुछ हुआ तो जिम्मेदार होगा सुप्रीम कोर्ट’, प्रवक्ता कॉकरोच का विवादित बयान

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को एक आपराधिक मामले में महुआ मोइत्रा को पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

इसी मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि अगर महुआ मोइत्रा को कुछ होता है तो इसके लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली बेंच जिम्मेदार होगी।

क्या है पूरा मामला?

महुआ मोइत्रा के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी ओर से वर्चुअली पेश होने की अनुमति मांगी गई थी।

महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि पिछली बार जब सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन गई थीं, तब कथित तौर पर उन पर अंडे फेंके गए थे। इसी आधार पर उन्होंने दोबारा भीड़ द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंका जताई और वर्चुअल पेशी की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट में जज ने क्या कहा?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने वर्चुअल पेशी की मांग पर राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि सांसद बनने और राजनीति में आने के बाद उन्हें अंडों से क्यों डर लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई थीं।

अदालत के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

CJP प्रवक्ता ने साधा सुप्रीम कोर्ट पर निशाना

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP प्रवक्ता सौरव दास ने जस्टिस दत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या अदालत यह चाहती है कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही की जरूरत बताते हुए जजों के न्यायिक आचरण पर भी सवाल उठाए।

सौरव दास ने आगे दावा किया कि बंगाल के मौजूदा हालात को देखते हुए यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यदि महुआ मोइत्रा को कुछ भी होता है, तो जस्टिस दीपांकर दत्ता के नेतृत्व वाली बेंच जिम्मेदार होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह के आचरण पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर संबंधित जजों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

CJP संस्थापक ने भी जताई आपत्ति

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संवैधानिक अदालत के जज विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां करते हैं तो आम लोगों के लिए क्या उम्मीद बचती है।

महुआ मोइत्रा को हाई कोर्ट से भी मिली थी राहत

इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने कथित नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले में 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को 5 अक्टूबर तक अंतरिम राहत दी थी। महुआ मोइत्रा का दावा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और उसके बाद CJP प्रवक्ता के बयान ने अब इस मामले को राजनीतिक और न्यायिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

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