डेस्क। घुटनों का दर्द आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है। ज्यादा वजन, चोट, गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस, लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना-खड़ा रहना और मांसपेशियों की कमजोरी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। हल्के दर्द और जकड़न में कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं, लेकिन लगातार या तेज दर्द होने पर कारण की जांच कराना जरूरी है।
गर्म सिकाई से मिल सकती है राहत
पुराने दर्द या घुटनों की जकड़न में 15 से 20 मिनट तक गर्म सिकाई दिन में 2 से 3 बार की जा सकती है। इससे मांसपेशियों और जोड़ों के आसपास की अकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यदि हाल ही में चोट लगी हो और घुटने में सूजन हो, तो शुरुआती समय में ठंडी सिकाई अधिक उपयोगी हो सकती है।

हल्की मालिश और एक्सरसाइज
हल्के गर्म सरसों के तेल से घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने पर आराम महसूस हो सकता है। हालांकि, तेज दबाव से मालिश नहीं करनी चाहिए और इसे दर्द के मूल कारण का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
घुटनों के दर्द में पूरी तरह निष्क्रिय रहना भी हमेशा सही नहीं है। डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से हल्की स्ट्रेचिंग, क्वाड्रिसेप्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज, वॉक या तैराकी मददगार हो सकती है। यदि किसी व्यायाम से दर्द बढ़ता है, तो उसे तुरंत रोक देना चाहिए।
वजन नियंत्रित रखना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ऐसे में धीरे-धीरे वजन कम करने से दर्द और दबाव में कमी आ सकती है। खान-पान में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
क्या खाने से बढ़ती है घुटनों की “ग्रीस”?
घुटनों की “ग्रीस” को मेडिकल भाषा में सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है, जो जोड़ को चिकनाई देने और हड्डियों के बीच घर्षण कम करने में मदद करता है। हालांकि, कोई एक खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर घुटनों की ग्रीस बढ़ाने का काम नहीं करता।
जोड़ों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए डाइट में ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट, अलसी और चिया सीड्स, कैल्शियम व विटामिन D के स्रोत, पर्याप्त प्रोटीन, फल और हरी सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। हल्दी और अदरक को भी सामान्य मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
घरेलू नुस्खों में बरतें सावधानी
मेथी, लहसुन, अजवाइन या अन्य जड़ी-बूटियों के घरेलू नुस्खों को घुटनों के दर्द का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता। त्वचा पर कुछ चीजें लगाने से जलन या एलर्जी भी हो सकती है। इसी तरह किसी आयुर्वेदिक तेल, काढ़े या दवा का लंबे समय तक सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
यदि घुटना अचानक बहुत सूज जाए, लाल या गर्म हो जाए, तेज दर्द हो, चोट के बाद पैर पर वजन न डाल पाएं, बुखार के साथ घुटने में दर्द हो या घुटना लॉक हो जाए, तो घरेलू उपचार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
लगातार कई हफ्तों तक दर्द, सूजन, जकड़न या चलने में परेशानी होने पर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से जांच कराना जरूरी है। ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस, लिगामेंट या मेनिस्क की चोट और गाउट जैसी समस्याओं में सही कारण का पता लगाकर इलाज करना आवश्यक है।