नई दिल्ली। भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर दो महीने से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.27 प्रति डॉलर तक पहुंचा, जो 29 जून के बाद इसका सबसे मजबूत स्तर बताया जा रहा है। इससे एक दिन पहले बुधवार को रुपया 94.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 0.74 फीसदी की मजबूती आई और यह 94.2712 के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में बढ़त कुछ कम हुई और मजबूती करीब 0.5 फीसदी रह गई।
94 रुपये का स्तर बेहद अहम1
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब डॉलर के मुकाबले 94 रुपये के स्तर पर बनी हुई है। माना जा रहा है कि अगर रुपया 94 के नीचे जाता है और इस स्तर पर टिकता है, तो निर्यातक अपनी हेजिंग बढ़ा सकते हैं।
ऐसी स्थिति में रुपये में और मजबूती देखने को मिल सकती है और यह करीब 92.50 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में 94 का स्तर रुपये के लिए अहम माना जा रहा है।
RBI की योजना से मिला रुपये को सहारा
रुपये की मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से डॉलर की बिक्री और देश में आए बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
RBI ने कुछ महीने पहले विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना शुरू की थी। 31 अगस्त तक इस माध्यम से कुल 136.37 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई गई।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रवासी भारतीयों के जमा धन का रहा। आंकड़ों के मुताबिक, FCNR(B) डिपॉजिट से 127.2 अरब डॉलर, विदेशी मुद्रा उधारी से 5.26 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) से 3.89 अरब डॉलर मिले।
खास बात यह है कि शुरुआत में इस योजना के जरिए सिर्फ 50-60 अरब डॉलर आने का अनुमान था। बाद में अनुमान को बढ़ाकर 80 अरब डॉलर किया गया, लेकिन वास्तविक रकम इससे काफी अधिक रही।
क्यों शुरू की गई थी FCNR(B) योजना?
RBI ने 8 जून को यह विशेष विदेशी मुद्रा योजना शुरू की थी। उस समय रुपये पर दबाव बढ़ रहा था। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी जैसे कारणों से भारतीय करेंसी कमजोर हो रही थी।
ऐसे समय में RBI ने देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने की रणनीति अपनाई। इसके तहत NRI से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने पर जोर दिया गया।
FCNR(B) अकाउंट NRI के लिए एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है, जिसमें वे अपनी विदेशी कमाई को विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं। इसमें रकम को पहले भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती। मूलधन और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में मिलते हैं, जिससे NRI को रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है।
रुपये को इन तीन वजहों से फायदा
कोटक सिक्योरिटीज के FX एनालिस्ट अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, फिलहाल रुपये को तीन प्रमुख कारणों से फायदा मिल रहा है।
- RBI की योजना के जरिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आई है।
- भारत की मजबूत GDP के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था को लेकर बाजार का भरोसा बढ़ा है।
- बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी मौजूद है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल रहा है।
बनर्जी का अनुमान है कि RBI की इस योजना के चलते कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह करीब 145 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
FCNR(B) विंडो बंद, अन्य सुविधाएं जारी
RBI की योजना के तहत FCNR(B) में नए जमा स्वीकार करने की सुविधा 31 अगस्त को बंद हो गई। इसे तय समय से करीब एक महीने पहले बंद किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि इस सुविधा को उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली।
हालांकि, योजना के तहत RBI के साथ विदेशी मुद्रा स्वैप की सुविधा 11 सितंबर तक जारी रहेगी। वहीं ECB और OFCB से संबंधित सुविधा 31 दिसंबर तक खुली रहेगी।
CareEdge Ratings के मुताबिक, बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता बढ़ी है। इससे बैंकों को आने वाले समय में फंडिंग जुटाने में कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल बाजार की नजर रुपये के 94 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बनी हुई है। अगर रुपया इस स्तर के नीचे मजबूती से टिकता है, तो भारतीय करेंसी में आगे भी तेजी देखने को मिल सकती है।