विश्वकर्मा जयंती 2026: कैसे शुरू हुई पूजा की परंपरा? जानें भगवान विश्वकर्मा की जन्म और पौराणिक कथा

धर्म डेस्क हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कला का देवता माना जाता है। हर साल विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारीगर, शिल्पकार, इंजीनियर, मजदूर, कारोबारी और औद्योगिक संस्थानों से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की विशेष पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा की परंपरा को सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश यानी कन्या संक्रांति से जोड़ा जाता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनकी आराधना से कार्य में कुशलता, सफलता और उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।

कैसे हुआ भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य?

पौराणिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं। एक परंपरा के अनुसार, भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग पर विराजमान थे। उनकी नाभि से कमल प्रकट हुआ और इसी कमल से भगवान ब्रह्मा का प्राकट्य हुआ। ब्रह्मा से जुड़े वंशक्रम में वास्तुदेव का उल्लेख मिलता है। वास्तुदेव और अंगिरसी से विश्वकर्मा के जन्म की मान्यता है।

कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने अपने पिता से वास्तुकला और निर्माण की विद्या प्राप्त की। आगे चलकर वे शिल्प और वास्तुकला के महान आचार्य माने गए। इसी वजह से पौराणिक कथाओं में उन्हें देवताओं के दिव्य भवनों और अद्भुत निर्माणों का निर्माता बताया गया है।

इन दिव्य निर्माणों से जुड़ा है नाम

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और इंद्र का वज्र जैसे दिव्य अस्त्र तैयार किए। वहीं भगवान कृष्ण की द्वारका और पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी के निर्माण का संबंध भी उनसे जोड़ा जाता है।

कुछ कथाओं में पुष्पक विमान और स्वर्ण लंका के निर्माण का उल्लेख भी मिलता है। एक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के लिए विश्वकर्मा ने स्वर्ण महल बनाया था, जिसे बाद में रावण ने दक्षिणा के रूप में मांग लिया था।

आज भी मनाई जाती है भव्य पूजा

समय के साथ विश्वकर्मा पूजा की परंपरा शिल्पकारों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों से आगे बढ़कर कारखानों, कंपनियों, दुकानों और तकनीकी संस्थानों तक पहुंच गई। इस दिन मशीनों और औजारों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा को आज श्रम, कौशल, तकनीक और निर्माण कार्य के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

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