नई दिल्ली। चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सामने आ रही चर्चाओं के बीच निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि SIR सहित हाल में लिए गए सभी महत्वपूर्ण फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद आयोग की ओर से कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण जारी किया गया।
आयोग ने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था में फैसलों को लेकर चर्चा, सुझाव और आपत्तियां सामने आना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि अंतिम निर्णय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। SIR की प्रक्रिया और इससे जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी आयोग ने इसी बात को दोहराया है।
कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे पत्र पर भी स्पष्टीकरण
आयोग ने कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए पत्र को लेकर भी स्थिति साफ की। ECI के अनुसार यह पत्र किसी नीतिगत फैसले या आयोग के आईटी डिवीजन की नीति से जुड़ा नहीं था। मामला प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्य और जिम्मेदारियों से संबंधित था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आईटी डिवीजन की निगरानी से जुड़े अधिकार उप चुनाव आयुक्त से वापस नहीं लिए गए थे।
SIR के बाद छूटे मतदाताओं को नाम जुड़वाने का मौका
निर्वाचन आयोग ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता या पहली बार मतदान करने वाले युवा का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है। इसके लिए संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवेदन किया जा सकता है।
आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO को पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। गोवा में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर छूटे हुए मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवा रहे हैं।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समय-सीमा
मतदाताओं के दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दिल्ली और महाराष्ट्र में समय-सीमा भी बढ़ाई गई है। दिल्ली में अब दावे और आपत्तियां 30 अक्टूबर 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी, जबकि इनके निपटारे की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 रखी गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की समय-सीमा 10 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
इस तरह चुनाव आयोग ने SIR और अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच अपने फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रिया पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है।