गाजीपुर। कवि अनन्तदेव पाण्डेय ’अनन्त’ की सुविख्यात भोजपूरी कविता में गांव के सजीव चित्रण ने बरबस लोगो के होंठो पर ‘गॅउवों गॉव बुझाते नइखे, आ जाती है और लोग उनकी कविता को गुनगाने लगते है। कवि अनन्त इस दुनिया मे नही रहे, उनकी कविता व कृतियां लोगो के हृदय मे वास करती है जो आज भी कविता के माध्यम से कवि ‘अनन्त’ अमर हो गये। 16 अक्टुबर को उत्तर प्रदेश, गाजीपुर नगर के स्टिमरघाट स्थित उनके आवास पर श्रंद्धाजलिं सभा का आयोजन किया गया है। जिसकी जानकारी देते हुए उनके एकलौते पुत्र गोपाल पाण्डेय ’’गौरव’’ ने जानकारी देते हुए बताया कि पैतृक गांव पचोखर के रहने वाले कवि अनन्त रेलवे से नौकरी आरम्भ कर खादय एवं औषधी सुरक्षा विभाग मेे सेवा प्रदान करते हुए जन सरोकार से जुड़े रहे और जन समस्याओ व अपने पीढ़ी के यादगार पहलुओ को अपने कविता के माध्यम से वर्णित करते रहे।
सेवानिवृत्ति के पश्चात लगभग 300 कविताओं का संग्रह इनके डायरी व पुस्तको मे संग्रहित है जो तत्कालीन समस्याओ और कुरीतियों, ग्रामीण अंचल व प्रकृति व हांस्य व्यंग से जुड़ी कविताएं समय समय पर उद्धृत होती रही। ग्रामीण अंचल और परिदृश्यो का सजीव चित्रण करने वाली सन् 2000 में रचित इनकी भोजपुरी कविता ‘‘गॅउवों गॉव बुझाते नईखे’’ काफी लोकप्रिय हुई। 50 पंक्तियों के इस कविता के माध्यम से उन्होने गांव के सारे पहुलूओ को छुआ है, ओखर, मूसर, कोठिला, कुण्डा सकरी, हॉड़ी परई, पथरा, पथरी, कठवत, बटुली, गगरा, लोटा के साथ बच्चो के खेल गुल्ली-डंडा, आंखमुदवल, ओल्हा-पाती, कउड़ी गोटी, तीज त्योहार जैसे ठेठ भोजपुरी को और लोकप्रिय बनाता है।
गॅउवों गॉव बुझाते नइखे,
अब कतहीं ऊ बाते नइखे,
बखरी बनें नींमन सस्ता
चउकठ खम्हा अउर निगस्ता,
धरन बल्ला कोरांे खपड़ा
से अब घर छवाते नइखे।
ढंेका जॉत कहॉ चलि गइलें
ओखर-मूसर कहा परइलें
होत भोरहरी में धम धम धम
चूरा कहीं कुटातेे नइखे,
इस कविता पुस्तक का प्रकाशन सन् 2021 में किया गया। साहित्य जगत से जुड़े हुए कवि एवं साहित्यकारो ने इस कविता पर अपने अपने ढंग से विचार व्यक्त किये जो इस पुस्तक में वर्णित है। हिन्दी के प्रख्यात समालोचक डॉ. जितेन्द्रनाथ पाठक, डॉ. विवेकी राय, डॉ.पी.एन.सिंह, प्रो. अवधेश प्रधान, प्रो. हरिकेश सिंह, डॉ. मान्धाता राय, प्रो. सदानन्द शाही, हरिनारायण हरिश, राजेन्द्र सिंह, ओम धीरज, कामेश्वर द्विवेदी, डॉ. अक्षय पाण्डेय, वंश नारायण ‘मनज’, डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश, सुभाष चंद्र यादव, डॉ. हैदर अली खॉ, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, कुमार शैलेन्द्र, डॉ. श्रीकान्त पाण्डेय, शेख जैनुल आब्दीन, उबैदुर्रहमान सिद्दकी, डॉ. व्यास मुनि राय, डॉ. रामनारायण तिवारी, डॉ. बालेश्वर विक्रम, डॉ. ऋचा राय, माधव कृष्ण जैसे 26 प्रख्यात साहित्यकारो का अभिमत से सुशोभित है।
वृद्धावस्था के रोग से ग्रसित होकर कवि अनन्त 3 अक्टुबर 2026 को स्टीमरधाट आवास पर लगभग 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जिनके अन्तेष्टि में साहित्यकार एवं जनसेवक में डॉ. मान्धाता राय, गोपाल राय, व्यापार मण्डल से विजय शंकर वर्मा, नगर प्रचारक विक्रम, बृजकिशन जायसवाल, डीजीसी कृपाशंकर राय, दीनदयाल, आदित्य, हृदयप्रकाश, संजय जायसवाल, पत्रकार चन्द्र कुमार तिवारी एवं हिमाशु राय, अजय पाण्डेय, प्रदीप रावत, दिनेश सहित सैकड़ो जन उपस्थित रहे।