धर्म डेस्क। इस साल दीपावली का पर्व कई मायनों में खास रहने वाला है। अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहने के कारण दीपोत्सव का उत्साह लगातार छह दिनों तक देखने को मिलेगा। तीन साल बाद एक बार फिर ऐसा संयोग बन रहा है, जब अमावस्या तिथि दो दिन तक रहेगी। पंचांग के अनुसार, इस बार 8 नवंबर को दीपावली और मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा, जबकि 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली का पर्व अमावस्या तिथि में प्रदोष काल और निशीथ काल के दौरान मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर रविवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर सोमवार की दोपहर तक रहेगी। इसी वजह से 8 नवंबर को ही दीपावली और लक्ष्मी पूजन का पर्व मनाया जाएगा।
6 नवंबर को धनतेरस से होगी दीपोत्सव की शुरुआत
छह दिवसीय दीपोत्सव का आगाज 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ होगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
इसके अगले दिन 7 नवंबर शनिवार को छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन दीपदान और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
8 नवंबर को बड़ी दीपावली और लक्ष्मी पूजन
8 नवंबर रविवार को दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और आकर्षक सजावट से रोशन करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग
दीपावली के अगले दिन यानी 9 नवंबर सोमवार को सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। सोमवार को अमावस्या पड़ने के कारण इस दिन स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों पर स्नान कर जरूरतमंदों को दान-पुण्य करेंगे। इस तरह दीपावली के बाद भी धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला जारी रहेगा।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव
इस बार दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा के लिए एक दिन का अंतर रहेगा। 10 नवंबर मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा।
इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा की जाएगी। परंपरा के अनुसार, घरों के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिरों में भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर गौशालाओं में गायों को स्नान कराकर सजाया जाता है और उनकी आरती की जाती है।
11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा दीपोत्सव का समापन
छह दिवसीय दीपोत्सव का अंतिम पर्व 11 नवंबर बुधवार को भाई दूज के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा और सहयोग का संकल्प लेंगे।
दीपोत्सव 2026: छह दिनों का पूरा कैलेंडर
| तारीख | दिन | त्योहार |
|---|---|---|
| 6 नवंबर | शुक्रवार | धनतेरस |
| 7 नवंबर | शनिवार | छोटी दीपावली / नरक चतुर्दशी |
| 8 नवंबर | रविवार | बड़ी दीपावली / लक्ष्मी पूजन |
| 9 नवंबर | सोमवार | सोमवती अमावस्या |
| 10 नवंबर | मंगलवार | गोवर्धन पूजा / अन्नकूट |
| 11 नवंबर | बुधवार | भाई दूज |
इस तरह वर्ष 2026 में धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक छह दिनों तक दीपोत्सव की रौनक रहेगी। दो दिवसीय अमावस्या और सोमवती अमावस्या का संयोग इस बार के दीपावली पर्व को विशेष बना रहा है।