इस्लामाबाद। भारत के साथ सिंधु जल संधि को लेकर जारी विवाद के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को भारत द्वारा स्वीकार करने से इनकार किए जाने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 1960 की सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच ‘रचनात्मक’ बातचीत की जरूरत बताई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने बुधवार को कहा कि स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि लागू है और दोनों देशों पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस फैसले को लागू कराने के लिए सभी उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।
संधि की भावना के अनुरूप बातचीत की अपील
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि की भाषा, प्रावधानों और भावना के अनुरूप इसे पूरी तरह लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत से भी इसी भावना के साथ संधि के प्रावधानों का पालन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को संधि में निर्धारित प्रावधानों के तहत विवादों का समाधान रचनात्मक बातचीत के जरिए तलाशना चाहिए।
भारत ने ट्रिब्यूनल के फैसले को ठुकराया
गौरतलब है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान ने मार्च 2026 में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का रुख किया था। पाकिस्तान ने संधि की स्थिति और उसके प्रावधानों को लेकर न्यायालय से निर्णय देने का अनुरोध किया था।
हालांकि, भारत ने सोमवार को ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज कर दिया। भारत ने न केवल फैसले को मानने से इनकार किया, बल्कि ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र और उसकी कार्यवाही की वैधता पर भी सवाल उठाए। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से संधि को लागू रखने और भारत के साथ बातचीत की अपील सामने आई है।